दिल्ली के 108 स्कूल भवन असुरक्षित घोषित, 54 जर्जर इमारतों को गिराने की तैयारी; बनेंगे नए भूकंपरोधी स्कूल
नई दिल्ली: स्कूली बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर राजधानी के 108 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल भवनों को असुरक्षित और खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से 54 इमारतों को बेहद जर्जर पाया गया है, जिनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
54 स्कूल भवन बेहद जर्जर
जांच में सामने आया है कि 108 असुरक्षित स्कूल भवनों में से 54 इमारतें बेहद खराब स्थिति में हैं और छात्रों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी हैं। सरकार ने इन भवनों को हटाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, इनमें से सात स्कूल भवनों को अगले कुछ महीनों के भीतर ध्वस्त किया जा सकता है।
PWD को सौंपी गई जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी पुराने स्कूल भवनों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) को इमारतों की सुरक्षा जांच और मरम्मत या पुनर्निर्माण की लागत का आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा 14 अन्य स्कूल भवनों के लिए भी स्ट्रक्चरल ऑडिट के प्रस्ताव भेजे गए हैं।
स्कूल भवनों की होगी डिजिटल प्रोफाइलिंग
शिक्षा विभाग अब सभी स्कूल भवनों की डिजिटल प्रोफाइलिंग करेगा। इस प्रक्रिया में भवनों की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा और अन्य सुरक्षा मानकों का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए स्कूल भवनों की नियमित निगरानी और समय-समय पर सुरक्षा मूल्यांकन सुनिश्चित करना है।
बनेंगे आधुनिक और भूकंपरोधी स्कूल
दिल्ली सरकार ने जर्जर इमारतों को गिराकर उनकी जगह आधुनिक और भूकंपरोधी G+4 (चार मंजिला) स्कूल भवन बनाने की योजना तैयार की है।
इसके साथ ही राजधानी में उपलब्ध 27 खाली सरकारी भूखंडों पर नए और स्थायी स्कूलों के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
सरकार का कहना है कि निर्माण और ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी, ताकि छात्रों की पढ़ाई पर किसी प्रकार का असर न पड़े।
प्राइवेट स्कूलों को भी दी थी चेतावनी
इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निजी स्कूलों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि यदि कोई स्कूल अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए बाध्य करता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि वह कभी भी किसी भी निजी स्कूल का निरीक्षण कर सकती हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी स्कूल अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से लिखें कि अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी किताबें, यूनिफॉर्म और स्टेशनरी खरीद सकते हैं।
उन्होंने कहा था कि किसी एक दुकानदार से सामान खरीदने का दबाव बनाने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।