• July 14, 2026

झारखंड को पर्यटन हब बनाने की तैयारी, 2024 में पहुंचे 5.85 करोड़ पर्यटक; निवेशकों को लुभाने की रणनीति तैयार

नई दिल्ली: राजधानी के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026 के दूसरे दिन झारखंड में पर्यटन और औद्योगिक विकास को लेकर व्यापक चर्चा हुई। “डेस्टिनेशन झारखंड- पर्यटन निवेश एवं समावेशी विकास को गति” विषय पर आयोजित सत्र में नीति-निर्माताओं, पर्यटन विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विकास साझेदारों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान झारखंड को देश के प्रमुख पर्यटन और निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने की रणनीतियों पर विस्तार से मंथन किया गया।

2024 में झारखंड पहुंचे 5.85 करोड़ पर्यटक

परामर्श में बताया गया कि झारखंड तेजी से एक बहुआयामी और निवेश आधारित पर्यटन राज्य के रूप में उभर रहा है। पर्यटन राज्य में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सतत विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में झारखंड में कुल 5.85 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ, जिनमें 4.40 करोड़ श्रद्धालु शामिल थे। यह राज्य की धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाता है।

पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा

राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देकर निजी निवेश, संस्थागत वित्त पोषण और पर्यटन ढांचे के विकास के लिए नए अवसर उपलब्ध कराए हैं।

झारखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इको-टूरिज्म, वन्यजीव पर्यटन, साहसिक पर्यटन, वाटर स्पोर्ट्स, माइनिंग टूरिज्म और जनजातीय समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर काम किया जा रहा है।

नई पर्यटन नीति और निवेश को बढ़ावा

राज्य सरकार प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 और होमस्टे नीति-2026 के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा डिजिटल सिंगल विंडो पंजीकरण व्यवस्था जैसी सुविधाओं के जरिए निवेश प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।

केंद्र सरकार की योजनाओं प्रसाद (PRASHAD) और स्वदेश दर्शन (Swadesh Darshan) के तहत भी राज्य में पर्यटन अवसंरचना को विकसित किया जा रहा है।

सरकार ने होटल, रिसॉर्ट, रोपवे, स्काईवॉक, वाटर स्पोर्ट्स, फ्लोटिंग रेस्तरां, हाउसबोट, कैंपिंग साइट और अनुभव आधारित पर्यटन परियोजनाओं में निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश की है।

झारखंड ने पर्यटन के लिए खोले अपने दरवाजे: सुदिव्य कुमार

इस अवसर पर पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज संपदा के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं के लिए भी पहचाना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “प्रकृति ने झारखंड को केवल खनिज संपदा ही नहीं, बल्कि अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य का भी उपहार दिया है। झारखंड ने पर्यटन के लिए अपने द्वार खोल दिए हैं और हम देशभर के पर्यटकों का स्वागत करते हैं।”

होमस्टे नीति से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मंत्री सुदिव्य कुमार ने सामुदायिक आधारित पर्यटन और होमस्टे मॉडल की रोजगार क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक फाइव स्टार होटल जहां करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है, वहीं 100 होमस्टे विकसित होने पर लगभग 500 लोगों को आजीविका से जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य की आगामी होमस्टे नीति को आकर्षक बनाया जाएगा, जिससे झारखंड देश के प्रमुख होमस्टे पर्यटन स्थलों में शामिल हो सके।

पर्यटकों और निवेशकों से झारखंड आने की अपील

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार झारखंड की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने निवेशकों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों से अपील करते हुए कहा कि झारखंड की अपनी अलग पहचान और आकर्षण है। यहां आने वाला हर व्यक्ति राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और आत्मीयता से जुड़ जाता है।

इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री इरफान अंसारी और कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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