आंध्र प्रदेश में मिला सोने का विशाल भंडार, जोंनागिरी बन सकता है देश की सबसे बड़ी निजी गोल्ड माइन
कुरनूल: आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित जोंनागिरी क्षेत्र में सोने के विशाल भंडार की खोज ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रायलसीमा क्षेत्र के जोंनागिरी, एर्रागुडी और पगड़ीरॉयी गांवों के आसपास फैले इलाके में बड़े पैमाने पर सोने की मौजूदगी का पता चला है। माना जा रहा है कि यह देश की सबसे बड़ी निजी गोल्ड माइन परियोजनाओं में से एक साबित हो सकती है। खनन विभाग और भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, पूरे क्षेत्र में करीब 50 हजार किलोग्राम (50 टन) सोने का भंडार होने का अनुमान है। इस सोने की अनुमानित बाजार कीमत 7,500 करोड़ से 9,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। फिलहाल लगभग 1,500 एकड़ क्षेत्र में परियोजना विकसित की जा रही है, जबकि व्यापक खनन गतिविधियों का दायरा भविष्य में और बढ़ाया जा सकता है। अब तक करीब 500 एकड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण और परीक्षण कार्य पूरा किया गया है, जहां लगभग 13 हजार किलोग्राम सोने की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। शेष क्षेत्र में विस्तृत खोज और खनन के बाद कुल भंडार का आंकड़ा और बढ़ सकता है। यह परियोजना जियोमैसूर सर्विसेज और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड द्वारा विकसित की जा रही है। इसे स्वतंत्रता के बाद देश की पहली बड़ी निजी गोल्ड माइन परियोजनाओं में गिना जा रहा है। क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और मशीनों की मदद से खनिज अयस्क को प्रोसेस कर सोना निकाला जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, जोंनागिरी क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से भी खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है। यह इलाका ग्रीनस्टोन बेल्ट का हिस्सा है, जहां प्राचीन काल में सोने और तांबे के खनन के प्रमाण मिले हैं। खुदाई के दौरान पुराने पत्थरों को पीसने और धातु निकालने के अवशेष भी मिले हैं, जो इस क्षेत्र के समृद्ध खनन इतिहास की ओर इशारा करते हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने 1991 से 1994 के बीच यहां विस्तृत ड्रिलिंग और अध्ययन किया था। उसी दौरान डोना ईस्ट और डोना वेस्ट ब्लॉकों में सोने के महत्वपूर्ण भंडार होने की पुष्टि हुई थी। कंपनियों का लक्ष्य शुरुआती चरण में हर साल 400 से 800 किलोग्राम शुद्ध सोने का उत्पादन करना है। भविष्य में इसे बढ़ाकर 1,000 से 2,000 किलोग्राम प्रतिवर्ष तक ले जाने की योजना है। लगभग 405 करोड़ रुपये की इस परियोजना से सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की उम्मीद है। आंध्र प्रदेश सरकार को खनन से मिलने वाली रॉयल्टी के रूप में भी बड़ा राजस्व प्राप्त होगा। अनुमान है कि उत्पादन बढ़ने के साथ सरकार को हर वर्ष दर्जनों करोड़ रुपये की आय हो सकती है। इस परियोजना को राज्य सरकार की महत्वपूर्ण औद्योगिक पहलों में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जोंनागिरी गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट के तहत गोल्ड प्रोसेसिंग प्लांट की पहली यूनिट का उद्घाटन करेंगे। साथ ही परियोजना के विस्तार के लिए दूसरी यूनिट की आधारशिला भी रखी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादन अनुमान के अनुरूप रहा, तो जोंनागिरी आने वाले वर्षों में भारत के स्वर्ण उत्पादन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे न केवल स्थानीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी, बल्कि देश की आयातित सोने पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।