पीएम मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से की फोन पर बात, बेटे के जन्म पर दी बधाई
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को उनके बेटे के जन्म पर शुभकामनाएं भी दीं।
पीएम मोदी ने एक्स पर दी जानकारी
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का फोन कॉल आया। हमने भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को अहम क्षेत्रों में और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उनके और ‘सेकंड लेडी’ को बेटे के जन्म पर हार्दिक बधाई दी और पूरे परिवार को शुभकामनाएं दीं।”
इस बातचीत को दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे रणनीतिक संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच अहम समय पर हुई बातचीत
दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिका में रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों को लेकर एक महत्वपूर्ण विधेयक को सीनेट की मंजूरी मिली है। यह विधेयक भविष्य में भारत और चीन जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
अमेरिकी सीनेट ने पास किया अहम बिल
अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत 86-11 से ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को मंजूरी दे दी है। इस कानून का उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उन देशों पर कार्रवाई का रास्ता तैयार करना है जो रूस से बड़े पैमाने पर तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखे हुए हैं।
यदि यह कानून पूरी तरह लागू होता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों से आयातित वस्तुओं पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
भारत और चीन पर पड़ सकता है असर
भारत और चीन, रूस से कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। ऐसे में यदि अमेरिका इस कानून के तहत टैरिफ लागू करता है, तो दोनों देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से होने वाली कमाई को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके वित्तीय संसाधनों पर दबाव बनाना बताया जा रहा है।
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी
इस विधेयक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं तथा रूस की सैन्य गतिविधियों से जुड़े संगठनों पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, उन पुराने और री-फ्लैग्ड ऑयल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर रूस वैश्विक प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।
भारत ने क्यों बढ़ाई थी रूसी तेल की खरीद?
साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई थी। इसी दौरान भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया था।
हालांकि, भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा की जरूरतों के आधार पर की जाती है।