• May 31, 2026

राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का नोटिस, 15 दिन की मोहलत; बिहार में सियासत तेज

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड सरकारी बंगला खाली करने के लिए 15 दिन की समयसीमा दी गई है। भवन निर्माण विभाग ने उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया है। यह सरकारी बंगला अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है।

सरकार की ओर से राबड़ी देवी को नया आवास 39, हार्डिंग रोड पर आवंटित किया गया है, लेकिन उन्होंने मौजूदा बंगला खाली करने से इनकार कर दिया है।

‘अपनी मर्जी से घर खाली नहीं करूंगी’ – राबड़ी देवी

दिल्ली से पटना लौटने के बाद शनिवार को राबड़ी देवी ने साफ कहा कि वह 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला अपनी मर्जी से खाली नहीं करेंगी।

उन्होंने कहा, “सरकार जितना भी फोर्स बुलाना चाहे बुला ले, लेकिन मैं यह आवास खाली नहीं करूंगी।” राबड़ी देवी के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मंत्री नंद किशोर राम ने लगाया भेदभाव का आरोप

इस मामले पर मंत्री नंद किशोर राम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है। रामनगर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद भी लंबे समय तक उन्हें पटना में सरकारी आवास आवंटित नहीं किया गया था।

उन्होंने बताया कि बाद में नियमानुसार उन्हें 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला आवंटित किया गया, लेकिन आदेश जारी होने के बावजूद अब तक आवास खाली नहीं किया गया है।

मंत्री ने कहा कि वह दलित समाज से आते हैं और संभवतः इसी वजह से उन्हें आवंटित सरकारी बंगला खाली नहीं किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

2006 से इसी बंगले में रह रही हैं राबड़ी देवी

राबड़ी देवी वर्ष 2006 से 10 सर्कुलर रोड स्थित इस सरकारी आवास में रह रही हैं। हालांकि, बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें कुछ समय पहले 39, हार्डिंग रोड स्थित आवास आवंटित किया गया था।

RJD के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने राबड़ी देवी के मौजूदा आवास में बने रहने का कारण बताते हुए कहा था कि इस बंगले में लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है, जो खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे लालू प्रसाद यादव के लिए अधिक सुविधाजनक है।

इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में सरकारी आवास आवंटन और नियमों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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