• May 14, 2026

NEET-UG 2026 विवाद: तमिलनाडु के CM सी. जोसेफ विजय ने की NEET खत्म करने की मांग

NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द किए जाने के बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को पूरी तरह समाप्त करने की मांग उठाई है।

बुधवार को जारी बयान में मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का आधार छात्रों के कक्षा 12वीं के अंक होने चाहिए, न कि NEET जैसी केंद्रीय परीक्षा। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में NEET आधारित प्रवेश प्रक्रिया को समाप्त किया जाए और राज्यों को अपनी मेरिट सूची के आधार पर सीटें भरने का अधिकार दिया जाए।

क्या है पूरा मामला?

3 मई 2026 को देशभर के 5,432 परीक्षा केंद्रों पर NEET-UG परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 22 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया। अकेले तमिलनाडु से करीब 1.4 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे।

हालांकि, परीक्षा के बाद पेपर लीक की खबरें सामने आने लगीं। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी से परीक्षा रद्द कर दी गई और मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंप दी गई।

‘सिस्टम की बड़ी विफलता’

मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब NEET परीक्षा को लेकर विवाद सामने आया हो। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में भी पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगे थे।

उन्होंने कहा कि पूर्व K. Radhakrishnan की अध्यक्षता वाली समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए 95 सुझाव दिए थे, लेकिन इसके बावजूद दो वर्षों के भीतर दोबारा पेपर लीक होना गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।

ग्रामीण और गरीब छात्रों को नुकसान: CM

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से NEET का विरोध करती रही है। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि NEET की वजह से ग्रामीण इलाकों, सरकारी स्कूलों और तमिल माध्यम में पढ़ने वाले गरीब छात्रों को मेडिकल शिक्षा में अवसर कम मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कोचिंग आधारित इस परीक्षा प्रणाली से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, जबकि 12वीं के अंकों के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया अधिक न्यायसंगत हो सकती है।

राज्यों को मिले अधिकार

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्यों को MBBS, BDS और AYUSH पाठ्यक्रमों में दाखिला अपने स्तर पर मेरिट यानी 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर देने की अनुमति मिलनी चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से NEET व्यवस्था खत्म करने और राज्यों को मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया में अधिक अधिकार देने की मांग की है।

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