• May 14, 2026

सुबह खाली पेट खाएं पंताभात, गैस-कब्ज से मिलेगा छुटकारा; जानिए इसके चौंकाने वाले फायदे

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खान-पान के कारण गैस, कब्ज, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। ऐसे में एक पारंपरिक भारतीय भोजन आपकी पाचन संबंधी परेशानियों को काफी हद तक कम कर सकता है। पूर्वी भारत में लोकप्रिय यह व्यंजन Panta Bhat, जिसे ओडिशा में पखाला और असम में पोइता भात भी कहा जाता है, प्राकृतिक प्रोबायोटिक का बेहतरीन स्रोत माना जाता है।

कैसे तैयार होता है पंताभात?

Panta Bhat बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। रात के बचे हुए पके चावलों में पानी डालकर उन्हें 8 से 10 घंटे तक ढककर छोड़ दिया जाता है। इस दौरान चावल में प्राकृतिक फर्मेंटेशन होता है, जिससे उसमें गुड बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स विकसित हो जाते हैं।

सुबह इसमें हल्का नमक, कच्चा प्याज, हरी मिर्च या नींबू मिलाकर खाया जाता है।

पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

फर्मेंटेड होने के कारण पंताभात पचने में हल्का होता है। इसमें मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे पाचन बेहतर होता है।

इसके नियमित सेवन से:

  • कब्ज की समस्या कम हो सकती है
  • पेट साफ रहने में मदद मिलती है
  • गैस और अपच से राहत मिल सकती है
  • आंतों की सेहत बेहतर होती है

इसमें मौजूद फाइबर मल त्याग को आसान बनाता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

शरीर को रखता है ठंडा

Panta Bhat की तासीर ठंडी मानी जाती है। गर्मियों के मौसम में यह शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करता है। जिन लोगों को शरीर में अधिक गर्मी, एसिडिटी या पेट में जलन की शिकायत रहती है, उनके लिए यह लाभकारी माना जाता है।

पोषक तत्वों से भरपूर

विशेषज्ञों के अनुसार, फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के बाद चावल में आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि फर्मेंटेड चावल में आयरन की मात्रा सामान्य चावल की तुलना में काफी अधिक हो सकती है।

इस वजह से यह:

  • एनीमिया से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है
  • शरीर को ऊर्जा देने में मदद करता है
  • इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकता है

ध्यान रखने वाली बातें

हालांकि पंताभात कई स्वास्थ्य लाभ देता है, लेकिन इसे हमेशा साफ बर्तन और स्वच्छ पानी से तैयार करना चाहिए। अत्यधिक खट्टा या लंबे समय तक रखा हुआ पंताभात खाने से बचना चाहिए।

यदि किसी को गंभीर पेट की बीमारी या संक्रमण की समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे नियमित आहार में शामिल करें।

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