सतारा जिला परिषद चुनाव में बड़ा उलटफेर, हंगामे और क्रॉस वोटिंग के बीच BJP की जीत
मुंबई: महाराष्ट्र के सतारा जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जहां बहुमत न होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज कर ली। इस चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग, हंगामा और मारपीट जैसी घटनाओं ने सियासी माहौल को गरमा दिया और महायुति गठबंधन के भीतर मतभेदों को खुलकर सामने ला दिया।
चुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और भाजपा के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दिया। वहीं विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को “ऑपरेशन लोटस” करार देते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
विधानसभा में भी गूंजा मामला
इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर राज्य विधानसभा के बजट सत्र में भी देखने को मिला। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायकों और मंत्रियों ने विधानसभा की सीढ़ियों पर प्रदर्शन करते हुए सतारा जिले के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी के निलंबन की मांग की।
सतारा के गार्डियन मंत्री शंभूराज देसाई ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पुलिस ने मंत्रियों के साथ धक्का-मुक्की की और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
शिंदे ने उठाया मुद्दा, CM ने दिया आश्वासन
मामला इतना बढ़ा कि एकनाथ शिंदे ने स्वयं विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने सतारा जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान हुए हंगामे की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में जवाब देते हुए पूरे मामले की जांच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
महायुति में बढ़ी खींचतान
इस पूरे घटनाक्रम ने महायुति गठबंधन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, सतारा की यह सियासी हलचल महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस और आरोप-प्रत्यारोप का कारण बन गई है।