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300 फिल्मों के ही-मैन की सिर्फ एक वेबसीरीज: धर्मेंद्र ने शेख सलीम चिश्ती बनकर सबको छोड़ा हैरान

मुंबई, 24 नवंबर 2025: 65 साल का सफर, 300 से ज्यादा फिल्में और अनगिनत सुपरहिट किरदार… लेकिन ओटीटी की दुनिया में धर्मेंद्र ने सिर्फ एक बार कदम रखा। और उस एक बार ने ही इतिहास लिख दिया। 2023 में ‘ताज: रॉयल ब्लड’ में उनका बदला हुआ रूप देखकर दर्शक दंग रह गए। उनका लुक, उनकी आभा और उनकी शांति—सब कुछ ऐसा था कि उन्हें पहचानना मुश्किल हो गया। और अब जब वो हमारे बीच नहीं रहे, उनकी यही वेबसीरीज उनके करियर का सबसे अनोखा और आखिरी उपहार बनकर उभरती है। ये कहानी सिर्फ एक किरदार की नहीं, बल्कि उस ट्रांसफॉर्मेशन की है जिसने फैंस को भावुक कर दिया।
ही-मैन से सूफी संत तक: एक ऐसा रूप जिसे किसी ने नहीं सोचा था**

‘ताज: रॉयल ब्लड’ में धर्मेंद्र का किरदार था

सूफी संत शेख सलीम चिश्ती—वही पवित्र संत जिन्होंने अकबर को वारिस का आशीर्वाद दिया था। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी भले ही कुछ मिनटों की थी, लेकिन असर वर्षों तक याद रहने वाला। पहला लुक सामने आते ही सोशल मीडिया पर तूफान आ गया। लोग हैरान थे—क्या ये वही धर्मेंद्र हैं जिन्हें उन्होंने हमेशा एक्शन, रोमांस और हीरोइज़्म में देखा था? लंबे सफेद दाढ़ी, पगड़ी, तस्बीह और शांत चेहरे के साथ उनका ये बदल जाना किसी चमत्कार से कम नहीं लगा। खुद धर्मेंद्र ने भी इसे अपने करियर का सबसे अलग अनुभव बताया था। और दर्शकों ने उन्हें सिर्फ सराहा नहीं—बल्कि सम्मान दिया। उनकी एंट्री वाले सीन में अकबर का सिर झुकाना, और धर्मेंद्र का मौन आशीर्वाद… वो पल ऐसा था कि दर्शक भूल गए कि यह वही ही-मैन है जिसने सिनेमा पर दशकों तक राज किया।

नसीर–अदिति–आसिम के बीच धर्मेंद्र

इस सीरीज में मुगल काल की राजनीति, प्रेम, विश्वासघात और अध्यात्म का संगम था। नसीरुद्दीन शाह अकबर बने थे, आसिम गुलाटी सलीम और अदिति राव हैदरी अनारकली। इनके बीच जब धर्मेंद्र स्क्रीन पर आते हैं, तो माहौल बदल जाता है। उनकी आँखों में जो शांति थी, उनके हर संवाद में जो धैर्य था, वह उन्हें बाकियों से अलग खड़ा करता है। दर्शकों ने लिखा कि चंद मिनटों में उन्होंने ऐसा प्रभाव छोड़ा जो पूरी सीरीज में किसी और ने नहीं किया। खासकर वह सीन जिसमें वे अकबर से कहते हैं—“बेटा होगा, नाम सलीम रखना”—उसकी गंभीरता और आध्यात्मिकता ने सभी का दिल जीत लिया। दोनों सीजन रिलीज हुए और हर रिव्यू में एक बात सामान्य थी—धर्मेंद्र इस पूरे प्रोजेक्ट की आत्मा साबित हुए।

सिर्फ एक वेबसीरीज? धर्मेंद्र का आखिरी और सबसे खूबसूरत सरप्राइज

जब ओटीटी का दौर शुरू हुआ, बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म उनके पास प्रस्ताव लेकर पहुंचे। लेकिन धर्मेंद्र हमेशा हँसकर कहते—“मुझे बड़ा परदा पसंद है।” वो कभी डिजिटल की ओर झुके ही नहीं। लेकिन ‘ताज’ के मेकर्स ने जब शेख सलीम चिश्ती का किरदार सुनाया, तो वो ठहर गए। उन्हें लगा कि ये किरदार सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक अनुभव है—शांति देने वाला, दुआ करने वाला। उन्होंने कहा—“जिंदगी में एक बार कुछ ऐसा करना चाहिए जो आत्मा को छू जाए।” और वही एक बार इतिहास बन गया। आज जब दुनिया उन्हें याद कर रही है, ‘ताज: रॉयल ब्लड’ उनका शांत, गहरा और अनमोल फाइनल एक्ट बनकर सामने खड़ा है। ही-मैन भले चले गए, लेकिन सूफी संत की मुस्कान और दुआ हमेशा स्क्रीन पर जीवित रहेगी।

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