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15 साल बाद जर्मनी से भारत लौटी महिला ने साझा किया अनुभव, बोलीं- ‘यह किसी रिवर्स कल्चर शॉक से कम नहीं’

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय महिला का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने 15 साल तक जर्मनी में रहने के बाद भारत लौटने के अपने अनुभव साझा किए हैं। महिला हाल ही में पुणे शिफ्ट हुई हैं और उन्होंने बताया कि इतने लंबे समय बाद अपने देश लौटना उनके लिए किसी “रिवर्स कल्चर शॉक” से कम नहीं रहा। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो में महिला ने विदेश में डेढ़ दशक से अधिक समय बिताने के बाद भारतीय जीवनशैली में फिर से खुद को ढालने की चुनौतियों और दिलचस्प अनुभवों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि जर्मनी के ठंडे और शांत माहौल से निकलकर भारत की गर्मी, धूप और चहल-पहल भरी जिंदगी में लौटना उनके लिए एक बड़ा बदलाव रहा।

मौसम, भाषा और खानपान में बड़ा बदलाव

महिला ने बताया कि जर्मनी में जहां वे ठंडे और बादलों से घिरे मौसम की आदी हो चुकी थीं, वहीं अब पुणे की धूप, गर्मी और उमस भरे मौसम का सामना कर रही हैं। उन्होंने चेरी ब्लॉसम और ट्यूलिप के बीच बिताए वर्षों के बाद अब गुलमोहर और बोगनविला के रंगों का आनंद लेने की बात कही। खानपान में भी उन्हें बड़ा बदलाव महसूस हुआ। जर्मनी में सेब और बेरी जैसे फलों की जगह अब भारतीय आम, खरबूजे और जामुन ने ले ली है। वहीं रोजमर्रा की बातचीत में जर्मन भाषा के स्थान पर अब अंग्रेजी, हिंदी और मराठी का इस्तेमाल करना उनके लिए एक नया अनुभव है।

शांत सड़कों से हॉर्न और भीड़भाड़ तक

महिला ने कहा कि जर्मनी की शांत और अनुशासित सड़कों के बाद भारत की व्यस्त ट्रैफिक व्यवस्था और लगातार बजते हॉर्न से दोबारा सामंजस्य बैठाना आसान नहीं है। हालांकि, वे धीरे-धीरे इस माहौल को समझने और अपनाने की कोशिश कर रही हैं।

‘जुगाड़’ और लचीलेपन की दुनिया में वापसी

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जर्मनी की व्यवस्थित और तकनीक आधारित जीवनशैली के बाद भारत में “जुगाड़” और लचीले समाधानों की संस्कृति को फिर से अपनाना भी उनके लिए एक अलग अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि यहां कई बार 30 से 60 मिनट की देरी को सामान्य माना जाता है, जबकि यूरोप में समय की पाबंदी को लेकर काफी सख्ती होती है। इसके अलावा, सेल्फ-सर्विस संस्कृति से निकलकर सुविधा और सेवा-आधारित व्यवस्था में लौटना भी उन्हें अलग महसूस हुआ।

सामाजिक व्यवहार में भी महसूस हुआ अंतर

महिला ने बताया कि यूरोप में जहां लोग निजी जीवन को लेकर अधिक संकोची होते हैं, वहीं भारत में लोग सहजता से व्यक्तिगत सवाल पूछ लेते हैं और नए लोगों से जल्दी घुल-मिल जाते हैं। उनके अनुसार, भारतीय समाज का यह खुलापन और अपनापन एक सुखद बदलाव है। उन्होंने ऑनलाइन डिलीवरी की तेज सुविधा का भी जिक्र किया और कहा कि कुछ ही मिनटों में घर तक किराना पहुंच जाना उन्हें काफी दिलचस्प लगा। वहीं यूरोपीय शहरों के शांत नजारों की तुलना में पुणे की ऊंची इमारतें और तेजी से हो रहा शहरी विकास भी उन्हें अलग अनुभव दे रहा है।

‘हर दिन कुछ नया सीख रही हूं’

वीडियो के साथ साझा किए गए भावुक कैप्शन में महिला ने लिखा कि भारत लौटने के बाद हर दिन उनके लिए एक नया अनुभव लेकर आ रहा है। कुछ दिन आसान होते हैं तो कुछ काफी चुनौतीपूर्ण, लेकिन हर दिन उन्हें नई सीख दे रहा है।उन्होंने कहा कि 15 साल बाद अपने देश लौटना केवल भौगोलिक बदलाव नहीं है, बल्कि सोच, दिनचर्या और जीवनशैली को नए सिरे से ढालने की प्रक्रिया भी है। फिलहाल वे पुणे में अपनी नई जिंदगी को धीरे-धीरे संवारने और इस बदलाव को पूरी तरह अपनाने की कोशिश कर रही हैं।

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