इंदौर में ‘वंदे मातरम’ विवाद पर सियासत तेज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
Indore नगर निगम के बजट सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है। Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार करते हुए कहा कि वे ‘जन गण मन’ और अन्य देशभक्ति गीत गाती हैं, लेकिन एक शब्द बोलने से परहेज करती हैं, जिससे उन्हें विवाद में डाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत की जाती है और “वंदे मातरम” शब्द उनके धार्मिक विश्वासों के अनुरूप नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मिट्टी पर उनका उतना ही हक है और मृत्यु के बाद उन्हें यहीं दफनाया जाता है।
रुबीना इकबाल ने आजादी के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि हो सकता है उस समय के लोगों ने हदीस न पढ़ी हो, लेकिन उन्होंने पढ़ी है और उसी के अनुसार आचरण करती हैं।
भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम” देश के स्वतंत्रता संग्राम की पहचान रहा है, जिसे Mahatma Gandhi, Subhas Chandra Bose, Bhagat Singh और Ashfaqulla Khan जैसे क्रांतिकारियों ने अपनाया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस गीत का विरोध सबसे पहले Muhammad Ali Jinnah ने किया था और आज भी इसका विरोध “राष्ट्रविरोधी मानसिकता” को दर्शाता है।
सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि पार्टी ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करती है, तो उसे ऐसे पार्षदों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
इस पूरे विवाद ने इंदौर की स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।