जब ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ सुनते ही टीवी के सामने जुट जाते थे बच्चे, 90s का सबसे लोकप्रिय शो था ‘द जंगल बुक’
90 के दशक में जब मनोरंजन के साधन सीमित थे और दूरदर्शन ही अधिकांश घरों का पसंदीदा चैनल हुआ करता था, तब एक ऐसा शो आया जिसने बच्चों के दिलों पर राज किया। रविवार का दिन आते ही बच्चे टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते थे और पूरे उत्साह के साथ अपने पसंदीदा कार्यक्रम ‘द जंगल बुक’ का इंतजार करते थे। इस शो ने न सिर्फ बच्चों को मनोरंजन दिया, बल्कि अपने यादगार किरदारों और सुपरहिट टाइटल सॉन्ग के जरिए एक पूरी पीढ़ी की यादों का हिस्सा बन गया।
रविवार की सुबह का सबसे बड़ा आकर्षण
दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला ‘द जंगल बुक’ 90 के दशक के सबसे लोकप्रिय बच्चों के कार्यक्रमों में गिना जाता है। मोगली, बालू, बघीरा और शेर खान जैसे किरदारों ने बच्चों को रोमांच, दोस्ती और साहस की अनोखी दुनिया से परिचित कराया। उस दौर में यह शो इतना लोकप्रिय था कि इसके प्रसारण के समय कई इलाकों में गलियां तक सूनी नजर आती थीं।
‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ बना पहचान
शो का टाइटल सॉन्ग ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ आज भी 90s के बच्चों की यादों में ताजा है। इस गीत के बोल प्रसिद्ध गीतकार गुलजार ने लिखे थे, जबकि संगीत विशाल भारद्वाज ने तैयार किया था। गायक अमोल सहदेव की आवाज ने इस गाने को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। शो के साथ-साथ इसका यह गीत भी एक सांस्कृतिक पहचान बन गया।
जापान से भारत तक का सफर
यह लोकप्रिय एनिमेटेड सीरीज सबसे पहले जापान में 2 अक्टूबर 1989 को प्रसारित हुई थी। बाद में 1993 में इसका भारतीय प्रसारण दूरदर्शन पर शुरू हुआ। भारतीय दर्शकों, खासकर बच्चों के बीच इसे जबरदस्त लोकप्रियता मिली। वर्षों बाद 2020 के लॉकडाउन के दौरान शो को दोबारा प्रसारित किया गया, जहां नई पीढ़ी ने भी इसे उतना ही पसंद किया।
क्या थी मोगली की कहानी?
सीरीज की कहानी मोगली नाम के एक बच्चे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे भेड़ियों का एक झुंड पालता है। जंगल में पल-बढ़ रहे मोगली की दोस्ती बालू और बघीरा से होती है, जबकि उसे शेर खान जैसे खतरनाक दुश्मन का सामना भी करना पड़ता है। यह कहानी प्रसिद्ध लेखक रुडयार्ड किपलिंग की मशहूर कृति The Jungle Book पर आधारित मानी जाती है।
आज भी ताजा हैं सुनहरी यादें
तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद The Jungle Book और उसका मशहूर गीत आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। 90 के दशक के बच्चों के लिए यह सिर्फ एक कार्टून शो नहीं, बल्कि बचपन की उन यादों का हिस्सा है जो आज भी चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं।