विधानसभा में थलापति विजय का पहला संबोधन: NEET खत्म करने और टू-लैंग्वेज पॉलिसी पर रखा स्पष्ट रुख
नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा में अपने पहले संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री थलापति विजय ने शिक्षा और भाषा नीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। अपने भाषण में उन्होंने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को समाप्त करने की मांग दोहराई और राज्य में टू-लैंग्वेज पॉलिसी के समर्थन को मजबूती से रखा।
NEET को लेकर केंद्र पर साधा निशाना
विधानसभा में बोलते हुए विजय ने कहा कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा से ग्रामीण क्षेत्रों, सरकारी स्कूलों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने हालिया पेपर लीक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लाखों छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेडिकल शिक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया राज्यों के अधिकार क्षेत्र में होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि राज्यों को फिर से यह अधिकार दिया जाए कि वे कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर MBBS, BDS और AYUSH जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश सुनिश्चित कर सकें।
टू-लैंग्वेज पॉलिसी पर दोहराया समर्थन
भाषा नीति के मुद्दे पर विजय ने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि तमिलनाडु अपनी पारंपरिक टू-लैंग्वेज पॉलिसी को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में तमिल और अंग्रेजी को ही प्रशासनिक एवं शैक्षणिक स्तर पर प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने तीन-भाषा नीति का विरोध करते हुए कहा कि तमिलनाडु की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। विजय ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था स्थानीय जरूरतों और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप ही आगे बढ़ेगी।
आलोचकों को भी दिया जवाब
अपने संबोधन के दौरान विजय ने उन आलोचनाओं का भी जवाब दिया, जिनमें उनकी पार्टी को केवल अभिनेताओं की पार्टी बताया गया था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जनता के मुद्दों और विकास के एजेंडे पर काम कर रही है और उसका उद्देश्य राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करना है। विजय के पहले विधानसभा भाषण को तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें शिक्षा, भाषा और राज्य के अधिकारों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।