लखनऊ के ईको गार्डन में छात्रों-शिक्षकों का प्रदर्शन, UPSI और लेखपाल भर्ती में पारदर्शिता की उठाई मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित ईको गार्डन में छात्रों और शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, स्कोरकार्ड जारी करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के साथ विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े शिक्षक भी शामिल हुए हैं। धरना स्थल पर मौजूद छात्रों और शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश लेखपाल और यूपीएसआई (UPSI) भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने के साथ-साथ चयन प्रक्रिया का पूरा हिसाब और पारदर्शी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र “हमें परिणाम नहीं, हिसाब चाहिए” के नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शन में शामिल कुछ शिक्षकों ने कहा कि अभ्यर्थियों की मांग केवल निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की है। उनका कहना है कि उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन से संबंधित स्कोरकार्ड उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि चयन प्रक्रिया पर किसी प्रकार का संदेह न रहे। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी लखनऊ पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह छात्रों और शिक्षकों की आवाज को मजबूती देने के लिए उनके साथ खड़े हैं। हालांकि धरना स्थल पर मौजूद छात्रों और शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन उनकी मांगों का समर्थन करना चाहता है तो उसका स्वागत है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह छात्र और शिक्षक हितों से जुड़ा होना चाहिए। उनका उद्देश्य केवल भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। धरना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई है। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि यूपी लेखपाल और यूपीएसआई भर्ती परीक्षाओं से संबंधित उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और स्कोरकार्ड जारी करने समेत सभी लंबित मुद्दों का समाधान किया जाए। ईको गार्डन में जारी इस आंदोलन में शामिल छात्रों के चेहरों पर अपनी मांगों को लेकर चिंता और उम्मीद दोनों साफ दिखाई दी। उनका कहना है कि वे तब तक अपनी आवाज उठाते रहेंगे, जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता।