यूपी में शिक्षा मित्रों और इंस्ट्रक्टरों को बड़ी राहत: वेतन बढ़ोतरी के लिए 250 करोड़ जारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा मित्रों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) के इंस्ट्रक्टरों के लिए बड़ी राहत का ऐलान करते हुए 250 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है। इस फैसले के तहत शिक्षा मित्रों और इंस्ट्रक्टरों के मानदेय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, जिसका लाभ राज्य के करीब 1.67 लाख कर्मचारियों को मिलेगा।
अब शिक्षा मित्रों को प्रति माह 18,000 रुपये वेतन मिलेगा, जो पहले 10,000 रुपये था। वहीं, इंस्ट्रक्टरों का मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यह नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी और बढ़ी हुई राशि 1 मई से कर्मचारियों के बैंक खातों में आनी शुरू हो जाएगी।
कितने लोगों को मिलेगा फायदा
राज्य में वर्तमान में लगभग 1,42,229 शिक्षा मित्र और 24,717 इंस्ट्रक्टर कार्यरत हैं। शिक्षा मित्रों के मानदेय में यह बढ़ोतरी करीब नौ साल बाद हुई है, जिससे लंबे समय से चल रही उनकी मांग को आंशिक रूप से राहत मिली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में यह भी घोषणा की थी कि शिक्षा मित्रों को ट्रांसफर की सुविधा दी जाएगी। साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल इलाज कवरेज भी मिलेगा।
वेतन बढ़ोतरी पर सियासत
मानदेय बढ़ोतरी के इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अखिलेश यादव ने इस कदम की आलोचना करते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में शिक्षा मित्रों को 40,000 रुपये तक वेतन मिलता था। उन्होंने इसे आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला बताया और बढ़ोतरी को अपर्याप्त कहा।
इंस्ट्रक्टरों के वेतन का कानूनी इतिहास
इंस्ट्रक्टरों के मानदेय को लेकर मामला लंबे समय तक अदालतों में चला। 2017 में उनका वेतन 9,000 से बढ़ाकर 17,000 रुपये करने का प्रस्ताव था, लेकिन यह लागू नहीं हो पाया। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 17,000 रुपये के भुगतान के साथ 9% ब्याज देने का आदेश दिया।
राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी, जिसके बाद डिवीजन बेंच ने भुगतान को सीमित कर दिया। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने 5 फरवरी को राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए इंस्ट्रक्टरों को सेवा में बनाए रखने और 2017 से 17,000 रुपये मानदेय लागू करने का निर्देश दिया।
शिक्षा मित्रों का विवाद और कोर्ट का फैसला
शिक्षा मित्रों की नियुक्ति 2001 में शुरू हुई थी। 2013–14 में कई शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में समायोजित किया गया था, लेकिन 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द कर दिया।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने 25 जुलाई 2017 को हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद लगभग 1.78 लाख सहायक शिक्षकों को वापस शिक्षा मित्र के पद पर भेज दिया गया और उनका वेतन करीब 50,000 रुपये से घटकर 3,500 रुपये रह गया।
इस फैसले के बाद राज्यभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें लखनऊ में भी व्यापक आंदोलन देखने को मिला। इसके बाद सरकार ने मानदेय बढ़ाकर 10,000 रुपये किया और शिक्षक भर्ती अभियानों में शिक्षा मित्रों को आयु में छूट और बोनस अंक देने की व्यवस्था की।