RBI का बड़ा फैसला: डिजिटल फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को मिलेगा 25,000 रुपये तक का मुआवजा, जानिए नए नियम
नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग के साथ ऑनलाइन बैंकिंग और UPI फ्रॉड के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार ग्राहकों को राहत देने के लिए नया नियम जारी किया है। इस व्यवस्था के तहत पात्र ग्राहकों को कुछ मामलों में 25,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। यह नया नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होगा।
किन लेनदेन पर लागू होगा नियम?
RBI के अनुसार यह नियम सभी प्रमुख डिजिटल बैंकिंग लेनदेन पर लागू होगा। इसमें UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन कार्ड पेमेंट जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान शामिल हैं। यदि इन माध्यमों से किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है, तो वह निर्धारित शर्तों के तहत मुआवजे का दावा कर सकेगा।
कब मिलेगा पूरा पैसा वापस?
यदि जांच में यह साबित होता है कि धोखाधड़ी बैंक की सुरक्षा व्यवस्था में कमी, तकनीकी खामी या बैंक की लापरवाही के कारण हुई है, तो ग्राहक पर किसी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होगी। ऐसे मामलों में बैंक को पूरी राशि वापस करनी होगी। इसके अलावा यदि धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे पेमेंट ऐप, पेमेंट गेटवे या टेलीकॉम सेवा से जुड़ी गड़बड़ी के कारण हुई है, तब भी ग्राहक को पूरी राशि लौटाई जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि ग्राहक घटना के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर अपने बैंक में शिकायत दर्ज कराए।
ग्राहक की गलती होने पर भी मिल सकती है राहत
RBI के नए नियम के तहत कुछ परिस्थितियों में ग्राहक की आंशिक लापरवाही होने पर भी मुआवजा मिल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया या गलती से OTP साझा कर दिया, लेकिन तुरंत बैंक को इसकी सूचना देकर शिकायत दर्ज करा दी, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे राहत मिल सकती है। हालांकि, यदि बैंक यह साबित कर देता है कि ग्राहक ने सुरक्षा संबंधी स्पष्ट चेतावनियों को नजरअंदाज किया या गंभीर लापरवाही बरती, तो ऐसे मामलों में मुआवजा नहीं भी मिल सकता है।
कितना मिलेगा मुआवजा?
RBI के नए नियम के अनुसार, छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पात्र ग्राहकों को कुल नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25,000 रुपये, जो भी कम हो, मुआवजे के रूप में मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति के साथ 50,000 रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है, तो उसे अधिकतम 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा। RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह विशेष मुआवजा किसी पात्र ग्राहक को जीवन में केवल एक बार ही दिया जाएगा।
मुआवजे का भुगतान कौन करेगा?
छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में मुआवजे का पूरा भार केवल बैंक पर नहीं होगा। इसके लिए RBI, ग्राहक का बैंक और जिस बैंक के खाते में धोखाधड़ी की राशि पहुंची है (लाभार्थी बैंक), सभी तय हिस्सेदारी के अनुसार भुगतान करेंगे।ग्राहकों को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध डिजिटल लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक को सूचित करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि नए नियम के तहत मिलने वाली राहत का लाभ लिया जा सके।