• September 12, 2026

विधायकों के टेलीफोन भत्ते पर उठे सवाल, हर साल खर्च हो रहे करोड़ों रुपये; वकील ने सरकार को दिया सुझाव

पंजाब के विधायकों को मिलने वाले टेलीफोन भत्ते को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। फाजिल्का निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट सतिंदर सिंह सवि काठपाल ने इस भत्ते की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग पंजाब सरकार और पंजाब विधानसभा के सामने रखी है।

एडवोकेट का कहना है कि मौजूदा समय में मोबाइल और टेलीफोन सेवाओं की कीमतों और इस्तेमाल के तरीके में काफी बदलाव आ चुका है। ऐसे में विधायकों को दिए जा रहे फिक्स्ड टेलीफोन अलाउंस की वर्तमान दर पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

हर महीने 17.55 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च

एडवोकेट सतिंदर सिंह सवि काठपाल के मुताबिक, पंजाब के 117 विधायकों को हर महीने करीब 15 हजार रुपये प्रति विधायक टेलीफोन भत्ते के तौर पर दिए जाते हैं। इस हिसाब से यह रकम हर महीने लगभग 17.55 लाख रुपये बैठती है।

उनका दावा है कि सालभर में इस मद में करीब 2.1 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। उनका मानना है कि इस खर्च की समीक्षा कर सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सकता है।

फिक्स्ड अलाउंस की जगह हो सकता है Reimbursement System

एडवोकेट सवि ने सरकार के सामने सुझाव रखा है कि यदि नियमों के तहत संभव हो तो फिक्स्ड टेलीफोन अलाउंस की जगह Reimbursement System लागू करने पर विचार किया जाए।

इस व्यवस्था में वास्तविक मोबाइल या टेलीफोन बिल के आधार पर भुगतान किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सकती है और जरूरत से ज्यादा भुगतान की संभावना भी कम होगी।

बोले- मांग किसी विधायक या पार्टी के खिलाफ नहीं

एडवोकेट सतिंदर सिंह सवि काठपाल ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विधायक या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। उनका उद्देश्य जनता के पैसे का मितव्ययी और उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारी कर्मचारी महंगाई भत्ते समेत अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी खर्च की समीक्षा भी जरूरी है। इसी को देखते हुए उन्होंने पंजाब सरकार और विधानसभा से टेलीफोन भत्ते की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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