मॉनसून सत्र से पहले पीएम मोदी का विपक्ष को संदेश, ’56 साल के नौजवान’ वाले तंज से राहुल गांधी पर साधा निशाना
नई दिल्ली: संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों से सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में तथ्य और तर्क के आधार पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले कुछ समय में भारत की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए देश के युवाओं और स्टार्टअप्स की सराहना की। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बिना नाम लिए तंज भी कसा।
’56 साल के नौजवान’ वाले बयान से साधा निशाना
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित रॉकेट विक्रम-1 की सफल उड़ान का जिक्र करते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश के युवाओं की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी दी गई है कि स्काईरूट स्टार्टअप में काम करने वाली टीम की औसत उम्र केवल 28 वर्ष है।
उन्होंने कहा, “ऐसे युवाओं ने यह कारनामा कर दिखाया है। मैं किसी 56 साल के नौजवान की बात नहीं कर रहा हूं।” प्रधानमंत्री के इस बयान को राहुल गांधी पर परोक्ष टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।
अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों पर जताया गर्व
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले एक महीने के दौरान भारत ने कई ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जिन पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान लगातार मजबूत हो रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष मॉनसून सत्र से पहले एक भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचा था और अब एक भारतीय निजी स्टार्टअप ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल कर देश का गौरव बढ़ाया है। उनके मुताबिक, दुनिया के चुनिंदा देशों में ही निजी कंपनियां इस तरह की उपलब्धियां हासिल कर पाई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत के युवाओं की क्षमता और उनकी आकांक्षाएं अंतरिक्ष की तरह असीम हैं।
विपक्ष से सहयोग की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दलों से मॉनसून सत्र के दौरान सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद का सुचारु संचालन और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है, जहां राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर गंभीर बहस होनी चाहिए। उनके अनुसार, जहां तथ्य और तर्क मौजूद होते हैं, वहां अनावश्यक हंगामे की कोई जगह नहीं होती।