October 7, 2026

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लखनऊ में ‘मुर्शिदाबाद कूच’ का ऐलान: बाबरी मस्जिद निर्माण विरोध में विवादित पोस्टर, हुमायूं कबीर को चुनौती

लखनऊ: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बन रही नई मस्जिद के प्रस्तावित निर्माण के विरोध में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीखे पोस्टर लगाए गए हैं। विश्व हिंदू रक्षा परिषद (VHRP) की ओर से शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए इन पोस्टरों में 10 फरवरी को मुर्शिदाबाद कूच का ऐलान किया गया है, जिससे सांप्रदायिक तनाव और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ गई हैं।
पोस्टरों में क्या लिखा?
पोस्टरों में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है:

  • हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर से गिराएंगे
  • बंटोगे तो कटोगे
  • हिंदुओं की विरोधी सरकार में इस बार होगा मुर्शिदाबाद में नई बाबरी पर आर-पार

सबसे नीचे अपील की गई है: चलो मुर्शिदाबाद 10 फरवरी। पोस्टरों में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर को मुगल आक्रांता के रूप में चित्रित किया गया है, साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर भी शामिल है। ये पोस्टर 1090 चौराहा, अंबेडकर चौराहा, हजरतगंज और शहर के अन्य हिस्सों में लगाए गए हैं। VHRP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने इस कूच की अपील की है।विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा मामला दिसंबर 2025 से जुड़ा है, जब तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा (रेजीनगर) इलाके में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद की प्रतीकात्मक नींव रखी थी। उन्होंने घोषणा की कि निर्माण 11 फरवरी 2026 से शुरू होगा। कबीर के अनुसार, यह एक बड़ा कॉम्प्लेक्स होगा जिसमें मस्जिद के अलावा इस्लामिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और शिक्षण संस्थान भी शामिल होंगे।
इस घटना पर बीजेपी और हिंदुत्व संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, इसे सांप्रदायिक उकसावा करार दिया। टीएमसी ने खुद को इससे अलग बताया और कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। कोलकाता हाईकोर्ट ने शिलान्यास पर रोक लगाने से इनकार किया था, लेकिन शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाली गई। मुर्शिदाबाद में 11 फरवरी के आयोजन को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं
लखनऊ में लगे इन पोस्टरों और मुर्शिदाबाद कूच के ऐलान से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होने की आशंका है। अभी तक प्रशासन की ओर से पोस्टर हटाने या कार्रवाई की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है, लेकिन पुलिस और स्थानीय अधिकारियों ने नजर रखना शुरू कर दिया है। यह मुद्दा यूपी और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में राजनीतिक बहस को तेज कर रहा है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों के नजदीक आने के साथ।

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