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कोलाथुर सीट पर हाई-प्रोफाइल मुकाबला, एम. के. स्टालिन के सामने बहुकोणीय चुनौती

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र कोलाथुर सीट एक बार फिर हाई-प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन गई है। इस सीट से मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की ओर से चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के पी. संथाना कृष्णन, तमिलगा वेत्री कझगम के वी. एस. बाबू और नाम तमिझर कच्ची के सौंदरा पांडियन लूथर सेठ मैदान में हैं। चार प्रमुख उम्मीदवारों के बीच यह मुकाबला काफी दिलचस्प और बहुकोणीय हो गया है।

DMK का मजबूत गढ़

कोलाथुर विधानसभा सीट को DMK का मजबूत किला माना जाता है, जहां से एम. के. स्टालिन लगातार जीत दर्ज करते आए हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी व्यक्तिगत छवि और क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य इस चुनाव में उनके पक्ष को मजबूत करते हैं। पार्टी को स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

AIADMK की रणनीति

वहीं, AIADMK के उम्मीदवार पी. संथाना कृष्णन इस बार कड़ी टक्कर देने की कोशिश में हैं। पार्टी एंटी-इन्कंबेंसी का फायदा उठाने और अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

TVK और NTK की एंट्री से मुकाबला रोचक

इसके अलावा TVK और NTK के उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। ये दोनों दल खासकर युवाओं और नए मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। इनके मैदान में उतरने से मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है, जिससे वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है।

कुल मिलाकर, कोलाथुर सीट पर मुख्य मुकाबला DMK और AIADMK के बीच ही माना जा रहा है, लेकिन अन्य दलों की मौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस हाई-प्रोफाइल सीट पर जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।

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