दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट: यूपी में सफर होगा तेज, लखनऊ 2 घंटे और वाराणसी 4 घंटे में पहुंचने का अनुमान
लखनऊ: दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट) उत्तर प्रदेश में यात्रा के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। प्रस्तावित योजना के अनुसार इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली से लखनऊ का सफर करीब 2 घंटे में और वाराणसी की यात्रा लगभग 4 घंटे में पूरी होने का अनुमान है। इस परियोजना को लेकर हाल ही में 17 जून को हुई एक समीक्षा बैठक में स्टेशन डिजाइन, कनेक्टिविटी और यातायात सुविधाओं पर चर्चा की गई। बैठक में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी साझा की और प्रयागराज में संभावित स्टेशन लोकेशन पर भी विचार किया गया।
यूपी के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा कॉरिडोर
करीब 865 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के तहत नोएडा (जेवर), आगरा, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़े जाने की योजना है। इससे न केवल अंतर-शहर यात्रा तेज होगी, बल्कि राज्य के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी।
यात्रा समय में बड़ी कमी का अनुमान
यदि यह परियोजना योजना के अनुसार पूरी होती है, तो कई प्रमुख रूटों पर यात्रा समय में भारी कमी आ सकती है—
- दिल्ली से लखनऊ: लगभग 2 घंटे
- दिल्ली से वाराणसी: लगभग 4 घंटे
- प्रयागराज से लखनऊ: लगभग 55 मिनट
- प्रयागराज से वाराणसी: लगभग 30 मिनट
प्रयागराज में स्टेशन के लिए चार संभावित स्थान
प्रयागराज में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए नीबी खुर्द, शांतिपुरम, प्रयाग स्टेशन क्षेत्र और एयरपोर्ट/परेड ग्राउंड के आसपास के क्षेत्रों पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का फोकस ऐसे स्थान पर स्टेशन विकसित करने पर है, जहां सड़क, रेल और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी बेहतर हो।
धार्मिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा
इस कॉरिडोर को महाकुंभ और माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्रयागराज में भारी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह प्रोजेक्ट यात्रा को आसान और सुविधाजनक बना सकता है। स्टेशन को मेट्रो और सड़क नेटवर्क से जोड़ने की भी योजना है।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के लिए मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी सहित कई जिलों में भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। प्रभावित किसानों और भूस्वामियों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर उत्तर प्रदेश में न केवल यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई गति देने की क्षमता रखता है।