आपातकाल : मैं और मेरा परिवार ताजिंदगी यह दंश भूल
फर्जी आरोप में मुझे एक तुगलकी फरमान (आपातकाल) में जेल भेज दिया गया था। मैं जेल गया तो परिवार के लोग डर गए। साथी-संगी भी कन्नी काटने लगे। वे सब डर-डर कर घर आते। उन लोगों को यह भय सताने लगा कि कहीं इसका खामियाजा उन्हें भी न भुगतना पड़े। मैं और मेरा परिवार ताजिंदगी यह दंश भूल नहीं सकता। यह कहना है कि जनपद के जवाहरलाल बरनवाल का। उन्होंने आयरन लेडी कही जाने वाली […]Read More






