विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल की कार्तिक-अगहन मास में निकलने वाली सवारियों के क्रम में आज (सोमवार) शाम को दूसरी सवारी धूमधाम से निकाली जाएगी। सवारी अवंतिका नाथ चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे और अपनी प्रजा का हाल जानेंगे। इस दौरान भगवान महाकाल दो स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान महाकाल की सवारी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक संदीप सोनी ने […]Read More
बिहार के पावन गंगा तट सिमरिया में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर स्नान करने के लिए सोमवार को बिहार ही नहीं, देेश के विभिन्न राज्यों और विदेशी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जिसकेेे कारण अहले सुबह से ही बरौनी जीरोमाइल से लेकर सिमरिया पुल तक एनएच-31 पर काफी भीड़ रही। पूर्णिमा के मौके गंगा स्नान कर शारीरिक, मानसिक सुख और मोक्ष की कामना के साथ गंगा स्नान करने के लिए रात से बिहार, बंगाल, आसाम, […]Read More
श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की पालकी लाव-लश्कर के साथ शनिवार रात्रि , बैकुंण्ठ चतुर्दर्शी को महाकाल मंदिर से गोपाल मंदिर पहुंची। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हरि-हर मिलन हुआ। यह प्राचीन मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के पश्यात बैकुंण्ठ चतुर्दशी पर श्री हर (श्री महाकालेश्वर भगवान ) श्री हरि (श्री द्वारकाधीश) को सृष्टि का भार सौंपते हैं। देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बलि के यहां विश्राम करने […]Read More
देव दीपावली की तैयारियां शुरू, नौ जोन और 11 सेक्टर
देव दीपावली पर्व की प्रशासनिक तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्व पर गंगा किनारे उमड़ने वाली लाखों की भीड़ के सुरक्षा प्रबंध को लेकर वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट भी सतर्क है। माना जा रहा है कि 10 लाख से अधिक श्रद्धालु देव दीपावली की भव्यता देख सकते हैं। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था का खाका भी तैयार कर लिया है। इस बार देव दिवाली 27 नवम्बर को होगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार देव […]Read More
मिथिलांचल के मनमोहक संस्कृति की याद दिलाने वाला लोक पर्व
विभिन्न लोक संस्कृति और लोक पर्व को अपनी धारा में बसाए मिथिलांचल में यूं तो अनेकों लोक उत्सव एवं लोक पर्व मनाए जाते हैं। लेकिन उन सबों में एक प्रमुख लोक पर्व है सामा-चकेवा। भाई बहन के कोमल और प्रगाढ़ रिश्ते को बेहद मासूम अभिव्यक्ति देने वाला यह लोक पर्व मिथिला संस्कृति के समृद्धता और कला का एक अंग है, जो सभी समुदायों के बीच व्याप्त बाधाओं को भी तोड़ता है। बीते रात से शुरू […]Read More






