मुंबई में मोहन भागवत का संबोधन: सेवा उपकार नहीं, कर्तव्य; आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने पर जोर
मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेळावा 2026’ और ‘कर्मयोगी पुरस्कार वितरण’ समारोह में Mohan Bhagwat ने सेवा और समाज के प्रति कर्तव्य पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सेवा कोई उपकार नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का दायित्व है और इससे स्वयं का भी विकास होता है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “यह कर्मवीरों का कार्यक्रम है, जो संवेदना से उपजा है। यह दया नहीं, बल्कि अपनेपन की भावना है। मनुष्य का जन्म देने के लिए है, और सेवा उसी का माध्यम है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत में मानवता का यह स्वभाव सनातन परंपरा से जुड़ा हुआ है और सदियों से कायम है।
उन्होंने समाज के वंचित और आदिवासी वर्गों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी परंपराओं और ज्ञान को सुरक्षित रखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में मिलने वाले अवसर आदिवासी समुदायों को भी समान रूप से मिलने चाहिए और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।
इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के दूरदराज आदिवासी क्षेत्रों में कार्य कर रहे एकल विद्यालयों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इन शिक्षकों ने वनवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में सामाजिक कार्य से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने चंद्रपुर और गडचिरोली जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम किया। उन्होंने कहा कि पहले इन इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी थी, लेकिन अब हालात में काफी सुधार हुआ है।
गडकरी ने बताया कि पहले जिन इलाकों तक पहुंचना मुश्किल था, वहां अब सड़कों और विकास कार्यों के जरिए बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर निवेश हो रहा है और विकास की गति तेज हुई है।
उन्होंने आदिवासी युवाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास को जरूरी बताते हुए कहा कि सामाजिक विषमताओं को दूर करना समय की जरूरत है। साथ ही, उन्होंने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में इसके माध्यम से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।