पश्चिम बंगाल: स्ट्रॉन्ग रूम पर सियासी घमासान, जानिए क्या है इसकी सुरक्षा व्यवस्था
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के बाद EVM और पोस्टल बैलेट बॉक्स को सुरक्षित रखने वाले स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य की 142 सीटों पर मतदान पूरा हो चुका है और अब 4 मई को होने वाली मतगणना का इंतजार है। इस बीच, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
यह विवाद 30 अप्रैल दोपहर से शुरू हुआ और शाम तक कई जगहों पर सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी BJP के नेताओं, उनके समर्थकों तथा प्रशासन-पुलिस के बीच तीखी बहस देखने को मिली। TMC नेताओं ने प्रशासन और पुलिस पर कथित ‘धांधली’ का आरोप लगाते हुए स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। वहीं, BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह हार की आशंका से पैदा हुई प्रतिक्रिया है।
क्या होता है स्ट्रॉन्ग रूम?
स्ट्रॉन्ग रूम चुनाव प्रक्रिया का बेहद अहम हिस्सा होता है। यह वह सुरक्षित स्थान है, जहां मतदान के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM), VVPAT और अन्य चुनावी दस्तावेजों को मतगणना तक सुरक्षित रखा जाता है। आमतौर पर यह जिला मुख्यालय या किसी सुरक्षित सरकारी भवन में बनाया जाता है और इसकी जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी या रिटर्निंग ऑफिसर के पास होती है।
कैसे होती है सुरक्षा व्यवस्था?
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा के लिए चुनाव आयोग ने कड़े दिशा-निर्देश तय किए हैं, जिनका सख्ती से पालन किया जाता है—
- स्ट्रॉन्ग रूम में केवल एक ही प्रवेश द्वार होता है, जबकि अन्य सभी दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह सील कर दी जाती हैं।
- कमरे में डबल लॉक सिस्टम होता है, जिसकी चाबियां अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती हैं।
- 24 घंटे त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है, जिसमें केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) और राज्य पुलिस तैनात रहती है।
- सीसीटीवी कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की जाती है, और उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी फुटेज देखने की अनुमति होती है।
- स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास आने-जाने वाले हर व्यक्ति का विवरण एक लॉगबुक में दर्ज किया जाता है।
बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन का कहना है कि सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। वहीं, राजनीतिक दलों की नजर अब मतगणना के दिन पर टिकी है, जहां इन आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद की जा रही है।