AIIMS रिसर्च: योग, प्राणायाम और ध्यान से कम हो सकते हैं PCOS के लक्षण
देश में महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। पहले इसे शहरी जीवनशैली से जुड़ी समस्या माना जाता था, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मामले सामने आने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसके प्रमुख कारण हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर यह स्थिति आगे चलकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और प्रजनन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। इसी बीच, AIIMS की एक हालिया रिसर्च में यह सामने आया है कि नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान PCOS के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
यह अध्ययन AIIMS के एनाटॉमी विभाग में मॉलिक्यूलर रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स लैब की प्रोफेसर डॉ. रीमा दादा के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में PCOS के मामलों में वृद्धि का एक बड़ा कारण बदलती जीवनशैली है। अध्ययन में पाया गया कि यदि महिलाएं नियमित रूप से योग, प्राणायाम और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो हार्मोनल संतुलन और लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
इस रिसर्च में 100 से अधिक महिलाओं को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने 12 सप्ताह तक, सप्ताह में पांच दिन और रोजाना लगभग 90 मिनट योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास किया।
अध्ययन के बाद महिलाओं में कई सकारात्मक परिवर्तन सामने आए—
शोध के अनुसार, योग और ध्यान से महिलाओं के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ, ब्लड शुगर नियंत्रण बेहतर हुआ और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस में कमी देखी गई। इसके साथ ही तनाव और डिप्रेशन के लक्षणों में भी राहत मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि PCOS जैसी स्थिति में दवाओं के साथ जीवनशैली में बदलाव, विशेषकर योग और ध्यान, लंबे समय तक बेहतर परिणाम दे सकते हैं।