राष्ट्रपति मुर्मू के एमपी दौरे से पहले जीतू पटवारी का पत्र, आदिवासी समाज के लिए उठाईं 10 बड़ी मांगें
मध्यप्रदेश: पांच दिवसीय दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य के आदिवासी समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होने का उल्लेख करते हुए पटवारी ने उनसे अपेक्षा जताई कि वे अपने प्रवास के दौरान आदिवासी समुदाय की वास्तविक स्थिति का संज्ञान लें और उनके अधिकारों तथा विकास से जुड़े विषयों पर पहल करें।
आदिवासी समाज की समस्याओं पर जताई चिंता
राष्ट्रपति को संबोधित पत्र में जीतू पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है, लेकिन इसके बावजूद आदिवासी समाज आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने लिखा कि राज्य के कई आदिवासी बहुल जिलों में विकास की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और बड़ी आबादी अब भी मुख्यधारा से दूर है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में दावा किया कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि दूरस्थ इलाकों में संचालित छात्रावासों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा तक सीमित पहुंच के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी युवा अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर चिंता
पत्र में आदिवासी अंचलों की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पटवारी ने कहा कि अनेक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी है। कुपोषण, एनीमिया, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर जैसी समस्याएं अब भी व्यापक रूप से मौजूद हैं। कई गांवों के लोगों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
रोजगार और पलायन बना बड़ी चुनौती
पत्र में कहा गया कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण आदिवासी युवाओं को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लघु वनोपज के उचित मूल्य, प्रसंस्करण और विपणन की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से आदिवासी परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और वनाधिकार का मुद्दा
जीतू पटवारी ने आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, मानव तस्करी और भूमि विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और सामुदायिक वन अधिकारों की मान्यता को लेकर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। विकास परियोजनाओं के कारण कई स्थानों पर आदिवासी समुदाय को विस्थापन और सांस्कृतिक पहचान के संकट का सामना करना पड़ रहा है।
राष्ट्रपति से कीं 10 प्रमुख मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएं शुरू करने, रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने, वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, युवाओं के लिए रोजगार मिशन, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ट्राइबल सब-प्लान (टीएसपी) फंड के पारदर्शी उपयोग जैसी मांगों पर पहल करने का आग्रह किया।
आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद की अपील
पत्र के अंत में पटवारी ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे अपने मध्यप्रदेश दौरे के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करें। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय अब केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और विकास में वास्तविक भागीदारी की उम्मीद रखता है।