• August 9, 2026

दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को कैबिनेट की मंजूरी, छात्रों के लिए 25% सीटें होंगी आरक्षित

नई दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ राजधानी में पहली बार निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, बिल को कानून बनने से पहले दिल्ली विधानसभा से पारित होना होगा। विधानसभा की मंजूरी के बाद ही यह लागू होगा।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि सरकार का उद्देश्य राजधानी के छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।

क्या है दिल्ली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल?

प्रस्तावित बिल के अनुसार, दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए संस्थानों को अपनी जमीन स्वयं खरीदनी होगी या वैध लीज पर लेनी होगी। सरकार इस उद्देश्य के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराएगी।

साथ ही, सभी निजी विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, यूजीसी (UGC) और अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।

दिल्ली के छात्रों को मिलेगा 25% आरक्षण

बिल का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि प्रत्येक पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित रहेंगी। इन सीटों पर प्रवेश दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार किया जाएगा।

फीस पर रहेगी सरकार की निगरानी

छात्रों से ली जाने वाली फीस को नियंत्रित करने के लिए एक रेगुलेटरी कमेटी गठित की जाएगी। यह समिति फीस निर्धारण और उससे जुड़े मामलों की समीक्षा करेगी, ताकि छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।

निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए प्रमुख शर्तें

ड्राफ्ट बिल के अनुसार—

  • विश्वविद्यालय के पास कम से कम 30 वर्ष की वैध लीज या स्वयं की भूमि होना आवश्यक होगा।
  • परिसर में आधुनिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, डिजिटल सुविधाएं और अन्य आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने होंगे।
  • शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति यूजीसी के मानकों के अनुरूप करनी होगी।
  • निजी विश्वविद्यालय किसी अन्य कॉलेज को अपने से संबद्ध (एफिलिएट) नहीं कर सकेंगे।
  • आवश्यकता के अनुसार नए कैंपस, क्षेत्रीय केंद्र और अध्ययन केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे।

सरकार रखेगी विश्वविद्यालयों पर निगरानी

बिल के अनुसार, दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री विश्वविद्यालय के विजिटर (Visitor) होंगे। उन्हें विश्वविद्यालय से जानकारी मांगने, निरीक्षण कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक निर्देश देने का अधिकार होगा।

जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय के प्रशासन, शैक्षणिक व्यवस्था और वित्तीय मामलों की जांच भी कराई जा सकेगी।

बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में होगी सरकारी भागीदारी

हर निजी विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट में कुलपति के साथ उच्च शिक्षा विभाग (DHE) या तकनीकी शिक्षा विभाग (DTTE) के सचिव अथवा उनके नामित अधिकारी शामिल होंगे। सरकार से जुड़े मामलों में निर्णय लेने के दौरान संबंधित अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

फर्जी संस्थानों पर लगेगी रोक

ड्राफ्ट बिल में केवल नाम मात्र के या फर्जी संस्थानों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों को UGC, AICTE, NMC, BCI, NCTE, PCI और ICAR जैसे सभी संबंधित नियामक संस्थानों के नियमों का पालन करना होगा।

विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ शैक्षणिक सहयोग भी केवल यूजीसी के निर्धारित नियमों के तहत ही किया जा सकेगा।

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि अब तक दिल्ली के कई छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों या विदेश जाना पड़ता था, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता था। सरकार चाहती है कि राजधानी में ही विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध हो, ताकि छात्रों को अपने शहर में बेहतर अवसर मिल सकें।

उन्होंने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को जल्द ही दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधानसभा से पारित होने के बाद दिल्ली में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

दिल्ली में अभी नहीं है कोई निजी विश्वविद्यालय

वर्तमान में दिल्ली में कोई भी निजी विश्वविद्यालय नहीं है। राजधानी में संचालित अधिकांश निजी कॉलेज गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (IP University) से संबद्ध हैं। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो दिल्ली में स्वतंत्र निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता खुल जाएगा, जिससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए निवेश और अवसरों की उम्मीद बढ़ेगी।

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