राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT रिपोर्ट तैयार, टिन्नू यादव की भूमिका पर बड़े खुलासे, भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच निर्णायक दौर में पहुंच गई है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट लगभग तैयार कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, अगले 24 घंटे के भीतर फाइनल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट में चोरी की घटना, मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर कई अहम खुलासे किए गए हैं।
सरकार रिपोर्ट की समीक्षा के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला ले सकती है।
टिन्नू यादव की भूमिका पहले से अधिक स्पष्ट
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की जांच में टिन्नू यादव की भूमिका पहले से अधिक स्पष्ट होकर सामने आई है। हालांकि, वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आधिकारिक प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा नहीं था, लेकिन मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में उसकी सक्रिय भूमिका बताई गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां और कई अहम व्यवस्थाओं तक उसकी पहुंच थी। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि दान पात्रों (हुंडियों) की चाबियां भी उसके पास रहती थीं, जिसके लिए प्रबंधन स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है।
भर्ती प्रक्रिया बनी चोरी की बड़ी वजह
एसआईटी की जांच में भर्ती प्रक्रिया को चोरी की घटना के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। जिन गणनाकर्मियों की गिरफ्तारी हुई है, वे मूल रूप से आउटसोर्स हाउसकीपिंग कर्मचारी थे, लेकिन उनसे चढ़ावे की गिनती का काम लिया जा रहा था।
जांच के मुताबिक, इन कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के अनुरूप नहीं हुई थी और इसमें निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। एसआईटी का मानना है कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को कमजोर किए जाने और सुरक्षा व्यवस्था में खामियों के कारण चोरी की गुंजाइश बनी।
वरिष्ठ अधिकारियों पर तय हो सकती है जिम्मेदारी
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की सिफारिश की गई थी, जिस पर कार्रवाई जारी है। जांच में मंदिर प्रबंधन की लापरवाही और निगरानी में कमी को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, आपराधिक साजिश में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका को लेकर एसआईटी ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, क्योंकि पुलिस की विवेचना अभी जारी है।
अब सभी की नजरें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर योगी सरकार द्वारा लिए जाने वाले अगले कदम पर टिकी हुई हैं।