बांकीपुर उपचुनाव से पहले प्रशांत किशोर को झटका, जनसुराज के दो बड़े नेता बीजेपी में शामिल
पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले जनसुराज पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह और गणितज्ञ प्रोफेसर केसी सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
दीघा सीट से जनसुराज के उम्मीदवार रहे बिट्टू सिंह ने 8 जुलाई को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब उनके और प्रोफेसर केसी सिन्हा के बीजेपी में शामिल होने से बिहार की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है और जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्टी के दो प्रमुख चेहरों का साथ छोड़ना प्रशांत किशोर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से चुनावी समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
प्रोफेसर केसी सिन्हा बिहार के सबसे चर्चित गणित शिक्षकों में गिने जाते हैं। उनकी गणित की किताबें और एक्सरसाइज बुक्स राज्य के लाखों छात्रों के बीच लोकप्रिय हैं। बिहार में गणित पढ़ने वाले छात्रों के बीच उनका नाम काफी जाना-पहचाना है।
वह कई विश्वविद्यालयों में कुलपति (Vice Chancellor) भी रह चुके हैं, जिसके कारण शिक्षण और अकादमिक जगत में उनकी मजबूत पहचान है। पिछले विधानसभा चुनाव में जनसुराज ने उन्हें पटना की कुम्हरार सीट से उम्मीदवार बनाया था।
बिट्टू सिंह मूल रूप से बीजेपी से जुड़े रहे हैं। हालांकि, टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने पार्टी से अलग होकर जनसुराज का दामन थामा और पिछले विधानसभा चुनाव में दीघा सीट से उम्मीदवार बने थे।
अब उनका दोबारा बीजेपी में शामिल होना राजनीतिक रूप से ‘घर वापसी’ के तौर पर देखा जा रहा है। माना जाता है कि दीघा क्षेत्र में उनका व्यवसायी वर्ग के बीच अच्छा प्रभाव है।
बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई थी। उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
यह उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव मैदान में उतरे हैं।
बांकीपुर उपचुनाव में प्रमुख उम्मीदवार इस प्रकार हैं—
बिहार की सियासत में इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। ऐसे में चुनाव से पहले जनसुराज के दो बड़े नेताओं का बीजेपी में शामिल होना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।