वैभव सूर्यवंशी पर क्लाइव लॉयड का बड़ा बयान, बोले- हमारे दौर में होता उसका असली टेस्ट
भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं। महज 15 साल की उम्र में बड़े-बड़े गेंदबाजों के खिलाफ उनका आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज क्रिकेट जगत को प्रभावित कर रहा है। इसी बीच वेस्टइंडीज के महान कप्तान क्लाइव लॉयड ने युवा बल्लेबाज की जमकर तारीफ की है और उन्हें भविष्य का बेहद रोमांचक खिलाड़ी बताया है। RevSportz को दिए एक इंटरव्यू में क्लाइव लॉयड से पूछा गया कि अगर वैभव सूर्यवंशी उनके दौर के दिग्गज वेस्टइंडीज तेज गेंदबाजों का सामना करते तो उनका प्रदर्शन कैसा रहता। इस पर लॉयड ने कहा कि यह युवा बल्लेबाज के लिए एक बड़ा टेस्ट होता, लेकिन उनकी प्रतिभा को देखते हुए मुकाबला बेहद दिलचस्प रहता। लॉयड ने कहा, “वैभव एक शानदार और रोमांचक खिलाड़ी हैं। वह बेहतरीन स्ट्राइकर हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले कई वर्षों तक हम उन्हें खेलते हुए देखेंगे। अगर वह हमारे दौर में खेलते तो यह उनके कौशल की असली परीक्षा होती, लेकिन हमारे लिए भी उनके खिलाफ गेंदबाजी करना उतना ही रोमांचक अनुभव होता।” पूर्व वेस्टइंडीज कप्तान ने कहा कि उनके समय की गेंदबाजी की सबसे बड़ी खासियत बल्लेबाजों की कमजोरियों को पहचानकर उन पर हमला करना था। उन्होंने कहा, “हमारी गेंदबाजी का तरीका अलग था। हम बल्लेबाजों की कमियों को निशाना बनाते थे और यही हमारी ताकत थी। ऐसे में वैभव के खिलाफ गेंदबाजी करना निश्चित रूप से एक दिलचस्प चुनौती होती।” लॉयड ने यह भी माना कि वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी देखने में बेहद आकर्षक है और आने वाले वर्षों में वह क्रिकेट जगत के लिए उत्साह का बड़ा कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवा बल्लेबाज में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और उनके खेल में भविष्य के बड़े खिलाड़ी बनने की झलक दिखाई देती है। इंटरव्यू के दौरान लॉयड ने हाल ही में मैदान पर खिलाड़ियों के बीच बढ़ती नोकझोंक और अनुशासन संबंधी मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में मैच रेफरी और अंपायरों की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। लॉयड के अनुसार, यदि मैदान पर कोई खिलाड़ी खेल भावना के विपरीत व्यवहार करता है तो रेफरी को मामले की समीक्षा कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “क्रिकेट अनुशासन और सम्मान का खेल है। खिलाड़ियों को खेल के नियमों और मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। अगर कोई सीमा लांघता है तो अधिकारियों को हस्तक्षेप कर उचित फैसला लेना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवाद की स्थिति में संबंधित खिलाड़ियों को मैच रेफरी के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए, जिसके बाद उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जा सकता है।