• June 17, 2026

गाजियाबाद की दो बेटियों ने पिता को दिया जीवनदान, एक ने किडनी तो दूसरी ने लिवर किया डोनेट

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोरटा गांव से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल छू लिया है। यहां दो बेटियों ने अपने पिता की जान बचाने के लिए ऐसा फैसला लिया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। बड़ी बेटी ने अपनी किडनी और छोटी बेटी ने अपना लिवर दान कर अपने पिता को नया जीवन दिया है।

गंभीर बीमारी ने बढ़ाई परिवार की चिंता

मोरटा गांव निवासी जयंत त्यागी पेशे से कारोबारी हैं। पिछले करीब एक साल से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। तीन महीने पहले स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने पर उन्होंने अस्पताल में जांच कराई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उनके लिवर और किडनी दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके हैं और उन्हें तत्काल प्रत्यारोपण की आवश्यकता है। डॉक्टरों की यह जानकारी सुनकर पूरा परिवार चिंता में पड़ गया। ऐसे मुश्किल समय में उनकी दोनों बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आईं।

बेटियों ने लिया बड़ा फैसला

22 वर्षीय रिषिका त्यागी, जिन्होंने हाल ही में बीटेक की पढ़ाई पूरी की है, और 19 वर्षीय खुशी त्यागी ने अपने पिता को बचाने के लिए अंगदान का निर्णय लिया। दोनों बहनों ने परिवार के सामने स्पष्ट कहा कि पिता की जान बचाने के लिए वे ही आगे आएंगी। परिजनों के अनुसार, बेटियों का मानना था कि यदि उनकी मां अंगदान करती हैं और उनकी तबीयत प्रभावित होती है तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसी सोच के साथ रिषिका ने अपनी एक किडनी और खुशी ने अपने लिवर का हिस्सा दान करने का फैसला किया।

ससुराल पक्ष ने भी किया समर्थन

रिषिका की शादी तय हो चुकी है। जब उन्होंने अपने होने वाले ससुराल पक्ष को इस निर्णय के बारे में बताया, तो उन्हें पूरा समर्थन मिला। परिवार ने उनके फैसले की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं। ससुराल पक्ष ने न केवल उनका हौसला बढ़ाया बल्कि इस निर्णय पर गर्व भी जताया।

सफल रहा ऑपरेशन

डॉक्टरों के अनुसार, पिता और दोनों बेटियों का ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। फिलहाल जयंत त्यागी और छोटी बेटी खुशी डॉक्टरों की निगरानी में हैं, जबकि रिषिका की हालत स्थिर और सामान्य बताई जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि सभी की रिकवरी अच्छी है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।

पूरे गांव में गर्व और खुशी का माहौल

इस घटना के बाद मोरटा गांव में खुशी और गर्व का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बेटियों ने साहस, जिम्मेदारी और परिवार के प्रति समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है। सोशल मीडिया पर भी दोनों बहनों की जमकर प्रशंसा हो रही है। लोग उन्हें साहस, त्याग और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक बता रहे हैं। यह कहानी एक बार फिर साबित करती है कि बेटियां न केवल परिवार की ताकत होती हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर सबसे बड़ा सहारा भी बन जाती हैं।

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