• June 2, 2026

क्या AC में सोने से बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द? जानिए क्यों होती है अकड़न और इससे बचने के आसान उपाय

भीषण गर्मी में एयर कंडीशनर (AC) राहत जरूर देता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह राहत सुबह उठते ही परेशानी में बदल जाती है। लंबे समय तक AC में बैठने या रातभर ठंडी हवा में सोने के बाद अक्सर लोगों को घुटनों, गर्दन, कंधों या हाथ-पैरों में दर्द और जकड़न महसूस होने लगती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो यह एक आम समस्या हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, घर के अंदर बहुत कम तापमान पर रहने से जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से गठिया, सूजन या पुरानी चोट की समस्या है, उनमें यह परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।

मेदांता गुरुग्राम के ऑर्थोपेडिक्स निदेशक डॉक्टर विनेश माथुर के मुताबिक, ठंडा तापमान शरीर की मांसपेशियों को सिकोड़ सकता है, जिससे उनकी लचीलापन कम हो जाता है। यही वजह है कि सुबह उठते समय घुटने मोड़ने, गर्दन घुमाने या शरीर को सामान्य रूप से हिलाने-डुलाने में कठिनाई महसूस हो सकती है। लंबे समय तक AC में रहने से मांसपेशियां सख्त हो सकती हैं, जिससे जोड़ों की गति सीमित हो जाती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन लोगों को पहले से गठिया (Arthritis), सूजन या जोड़ों से जुड़ी कोई समस्या है, वे तापमान में बदलाव के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। ठंडे वातावरण में ब्लड फ्लो अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, जिससे जोड़ों में अकड़न और दर्द बढ़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, जैसे ऑफिस में कंप्यूटर के सामने बैठना या AC वाली कार में सफर करना, भी समस्या को बढ़ा सकता है।

एक और अहम कारण शरीर में मौजूद ‘साइनोवियल लिक्विड’ को माना जाता है, जो जोड़ों को आसानी से मूव करने में मदद करता है। लंबे समय तक ठंडे वातावरण और कम गतिविधि के कारण यह द्रव गाढ़ा हो सकता है, जिससे गर्दन, पीठ और घुटनों में जकड़न महसूस होने लगती है।

हालांकि, कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि AC का तापमान बहुत कम न रखें, शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और हर 30 से 45 मिनट में थोड़ा टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और जोड़ों में जकड़न कम हो सकती है।

अगर जोड़ों का दर्द और अकड़न कई दिनों तक बनी रहे, सूजन बढ़ने लगे, त्वचा का रंग बदलने लगे या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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