• April 25, 2026

नीति आयोग में बंगाल की मजबूत मौजूदगी: अशोक लाहिड़ी उपाध्यक्ष, गोवर्धन दास सदस्य नियुक्त

नई दिल्ली: देश के प्रमुख नीति-निर्माण संस्थान नीति आयोग में पश्चिम बंगाल से दो प्रतिष्ठित नामों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। वरिष्ठ अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि प्रसिद्ध वैज्ञानिक गोवर्धन दास को सदस्य बनाया गया है।

इन नियुक्तियों को विशेषज्ञता और अनुभव के साथ-साथ राष्ट्रीय नीति-निर्माण में बंगाल के योगदान के रूप में भी देखा जा रहा है।

अशोक लाहिड़ी: चार दशक का अनुभव

अशोक लाहिड़ी देश के सबसे वरिष्ठ और अनुभवी अर्थशास्त्रियों में गिने जाते हैं। वे भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और 15वां वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं।

चार दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने आर्थिक नीति-निर्माण के कई अहम पदों पर काम किया है। इसके अलावा वे विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और एशियाई विकास बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं।

शैक्षणिक रूप से वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र हैं। उन्हें कोलकाता की बौद्धिक परंपरा का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है और वे लंबे समय से बंगाल के विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

मोदी सरकार का विजन और नीति आयोग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योजना आयोग की जगह नीति आयोग का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाना है। अशोक लाहिड़ी की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शुभेंदु अधिकारी ने दी बधाई

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने लाहिड़ी को बधाई देते हुए कहा कि उनका अनुभव और दृष्टिकोण देश के विकास में नई गति देगा। उन्होंने इसे पूरे पश्चिम बंगाल के लिए गर्व का क्षण बताया।

कौन हैं गोवर्धन दास?

नीति आयोग के नए सदस्य गोवर्धन दास एक प्रतिष्ठित मॉलिक्यूलर वैज्ञानिक हैं। वे इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोग और सेल बायोलॉजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखते हैं। वे वर्तमान में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल के निदेशक हैं और पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रह चुके हैं।

उनका शोध विशेष रूप से तपेदिक (TB) के रोगजनन पर केंद्रित रहा है, जिसके लिए उन्हें वैश्विक पहचान मिली है।

अंतरराष्ट्रीय अनुभव

गोवर्धन दास ने येल यूनिवर्सिटी, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पिटल, क्वाज़ुलु-नटाल यूनिवर्सिटी और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम किया है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

गोवर्धन दास का जीवन संघर्ष और प्रेरणा की कहानी है। बांग्लादेश से आए दलित शरणार्थी परिवार में जन्मे दास ने बेहद कठिन परिस्थितियों में बचपन बिताया। उनके पिता एक गरीब किसान थे और उन्हें स्ट्रीट लाइट की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी।

कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने शिक्षा के बल पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। सामाजिक चुनौतियों और व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना करते हुए भी उन्होंने राष्ट्र-निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी।

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