महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर संसद में टकराव के आसार, तीन दिन का विशेष सत्र अहम
गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए यह विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की तैयारी है।
सरकार का लक्ष्य है कि 2029 से महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हो जाए। हालांकि, यह विधेयक 2023 में ही कानून बन चुका है, लेकिन इसके लागू होने के तौर-तरीकों को लेकर अब सियासत तेज हो गई है।
सीटों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित डिलिमिटेशन के तहत हर राज्य की लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी पूरी तरह जनसंख्या के अनुपात के आधार पर होगी, ताकि किसी राज्य के साथ अन्याय न हो। सरकार का कहना है कि विधेयक की भाषा स्पष्ट है और संसद में इसे विस्तार से समझाया जाएगा।
विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
विपक्षी दलों का आरोप है कि महिला आरक्षण के बहाने सरकार डिलिमिटेशन लागू करने की रणनीति बना रही है। खासतौर पर दक्षिण भारत की पार्टियां इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि अगर लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 की जाती है, तो उत्तर भारत के राज्यों की सीटें ज्यादा बढ़ेंगी और दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
इस मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी पार्लियामेंट्री स्ट्रैटजी कमेटी की बैठक भी बुलाई। पार्टी का कहना है कि वह महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए।
दक्षिण के नेताओं की चेतावनी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार ने एकतरफा फैसला लिया, तो जनता सड़कों पर उतर सकती है। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी इस मुद्दे पर बड़े विरोध की आशंका जताई है।
सरकार ने दिया भरोसा
विपक्ष का कहना है कि विधेयक में सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इस पर सरकार ने सफाई दी है कि सीटों की संख्या और उनका बंटवारा डिलिमिटेशन आयोग तय करेगा, जो पूरी तरह निष्पक्ष और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत काम करेगा।
सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का समाधान किया जाएगा, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। आने वाले तीन दिन संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव के संकेत दे रहे हैं।