New Parliament: सावरकर की जयंती पर होगा नई संसद का उद्घाटन, संयोग या सुनियोजित ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को संसद के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करेंगे. विपक्ष की आँखों में नई संसद का निर्माण शुरू से ही खटक रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नई संसद के साथ-साथ सेंट्रल विस्टा के पूरे प्रोजेक्ट को ही पैसे की बर्बादी कहा था और हाल ही में उन्होंने इसे मोदी की निजी महत्वाकांक्षा का प्रोजेक्ट भी बताया है. खैर विपक्ष की नोक झोंक तो चलती ही रहेगी हम आपको बताते है की नई संसद का निर्माण कब और कैसे शुरू हुआ .
दरअसल 5 अगस्त 2019 को लोकसभा तथा राज्यसभा, दोनों सदनों ने सरकार से संसद के नए भवन के निर्माण के लिए आग्रह किया था. इसके बाद 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के नए भवन का शिलान्यास किया था. और अब संसद के नवनिर्मित भवन को गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है.
सवाल आता है कि नई इमारत आखिर बनाई क्यों गई है?
अब इसका जवाब ये है कि संसद की पुरानी बिल्डिंग 1927 में बनकर तैयार हुई थी और तकरीबन 100 साल पुरानी हो चुकी है, लोकसभा सचिवालय के मुताबिक, नई जरूरतों को देखते हुए पुरानी बिल्डिंग अब उपयुक्त नहीं रह गई थी क्योंकि जगह कम होने के चलते सांसदों को न सिर्फ बैठने में दिक्कत होती थी बल्कि पुरानी इमारत में आधुनिक सुविधाओं और तकनीक का भी अभाव था।

अब हम बताते है कि नयी संसद में कितने सदस्य बैठ सकते है साथ ही इसमें और क्या नयी चीज़े बनाई गयी है।
वैसे संसद के वर्तमान भवन में लोकसभा में 550 जबकि राज्यसभा में 250 सदस्यों की बैठने की व्यवस्था है. भविष्य की जरूरतों को देखते हुए संसद के नवनिर्मित भवन में लोकसभा में 888 जबकि राज्यसभा में 384 सदस्यों की बैठने की व्यवस्था की गई है. साथ ही संसद सदस्यों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थान भी है।
नई संसद (New Parliament) को बनाने का टेंडर टाटा प्रोजेक्ट को साल 2020 के सितंबर में दिया गया था. इसकी लागत 861 करोड़ रुपये मानी गई थी. फिर बाद में कुछ अतिरिक्त कामों के चलते यह कीमत 1,200 करोड़ रुपये तक पहुंची थी.
बात करे अगर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की तो प्रोजेक्ट में शामिल कर्तव्य पथ का काम पूरा हो चुका है. इसके अलावा केंद्रीय सचिवालय, एक्जेक्यूटिव एनक्लेव, नेशनल म्यूजियम आदि चीजों पर काम चल रहा है. जानकारी के लिए बता दे कि नई संसद केंद्र सरकार के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का ही एक हिस्सा है.
अब बात आती है कि उद्घाटन के लिए 28 मई की तारीख ही क्यों चुनी गयी ?
नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई को और दूसरी बार 30 मई को शपथ ली थी. ऐसे में एक चर्चा यह भी है कि फिर नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को क्यों हो रहा है? मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने के कार्यक्रम भी आधिकारिक तौर पर 30 मई से शुरू होंगे, तो 28 मई का दिन नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए क्यों चुना गया?
दिलचस्प बात ये भी है कि 28 मई को वीर सावरकर की जयंती है. उनका जन्म 28 मई 1883 को हुआ था. इस साल 28 मई को उनकी 140वीं जयंती मनाई जाएगी. अब यह देखने वाली बात होगी कि क्या ये महज संयोग है कि नए संसद भवन का उद्घाटन वीर सावरकर की जयंती पर हो रहा है या फिर ये सुनियोजित है.






