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कांशीराम जयंती पर मायावती का कांग्रेस पर हमला, समर्थकों से बोलीं—’पार्टी से सतर्क रहें’

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती के मौके पर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने BSP समर्थकों और कांशीराम के अनुयायियों से कांग्रेस को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। मायावती का कहना है कि कांग्रेस की ‘दलित-विरोधी सोच और मानसिकता’ के कारण ही बहुजन समाज पार्टी का गठन करना पड़ा था।

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित कांशीराम जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उनके योगदान की सराहना की। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा था, “अगर जवाहरलाल नेहरू आज जीवित होते तो कांशीराम कांग्रेस से मुख्यमंत्री बनते।”

अम्बेडकर को लेकर कांग्रेस पर निशाना
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक केंद्र की सत्ता में रहते हुए दलितों के मसीहा और भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव आंबेडकर का उचित सम्मान नहीं किया।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने कभी भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का सम्मान नहीं किया और न ही उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया। ऐसे में यह पार्टी अब मान्यवर कांशीराम को इस उपाधि से कैसे सम्मानित कर सकती है?”

BSP को कमजोर करने की साजिश का आरोप
बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि जब कांशीराम का निधन हुआ था, तब केंद्र में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया था।

मायावती ने कहा कि कई राजनीतिक दल और संगठन कांशीराम के नाम का इस्तेमाल कर दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न पार्टियां अलग-अलग तरीके अपनाकर BSP को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

कार्यकर्ताओं से कार्यक्रम सफल बनाने की अपील
मायावती ने कांग्रेस के मौजूदा रुख को BSP को कमजोर करने की रणनीति बताया और कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने को कहा। उन्होंने पार्टी समर्थकों से 15 मार्च 2026 को कांशीराम की जयंती पर आयोजित होने वाले BSP के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने और उन्हें सफल बनाने की अपील की।

गौरतलब है कि कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की थी। उनका उद्देश्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यकों को एकजुट कर एक मजबूत राजनीतिक शक्ति बनाना था।

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