लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बड़ी पहल: 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह गठित, सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी
नई दिल्ली, 23 फरवरी 2026: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से 60 से अधिक देशों के साथ ‘संसदीय मैत्री समूह’ (Parliamentary Friendship Groups) का गठन किया है। यह कदम भारत की संसद को विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष, नियमित और बहुदलीय संवाद बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, ताकि राजनयिक संबंधों के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी मजबूत विश्वास और सहयोग कायम रहे।
सभी दलों की भागीदारी सुनिश्चित
इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है। इनमें रवि शंकर प्रसाद, एम. थंबीदुराई, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, संबित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों को शामिल किया गया है। इनमें रवि शंकर प्रसाद, एम. थंबीदुराई, पी. चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, संबित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
किन देशों के साथ बने मैत्री समूह?
ये मैत्री समूह निम्नलिखित देशों/संसदों के साथ गठित किए गए हैं:
श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजराइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात।
ये मैत्री समूह निम्नलिखित देशों/संसदों के साथ गठित किए गए हैं:
श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजराइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात।
मकसद: प्रत्यक्ष संवाद, सीख और विश्वास
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कहना है कि ये समूह सांसदों को विदेशी समकक्षों से सीधा संवाद करने, अनुभव साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाने का मंच प्रदान करेंगे। इनके माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियां, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का कहना है कि ये समूह सांसदों को विदेशी समकक्षों से सीधा संवाद करने, अनुभव साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाने का मंच प्रदान करेंगे। इनके माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियां, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
संसदीय राजनय पर जोर
ओम बिरला ने हमेशा संसदीय राजनय को भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बताया है। उनके नेतृत्व में भारतीय संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी बढ़ाई है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
ओम बिरला ने हमेशा संसदीय राजनय को भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बताया है। उनके नेतृत्व में भारतीय संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी बढ़ाई है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
लंबी अवधि का सहयोग और जनता-से-जनता संपर्क
ये मैत्री समूह संसद-से-संसद और जनता-से-जनता संपर्क बढ़ाने पर केंद्रित हैं। नियमित संवाद, अध्ययन यात्राएं और संयुक्त बैठकों के जरिए दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल भारत की संसद को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज और देशों के बीच सेतु के रूप में मजबूत करेगी।
ये मैत्री समूह संसद-से-संसद और जनता-से-जनता संपर्क बढ़ाने पर केंद्रित हैं। नियमित संवाद, अध्ययन यात्राएं और संयुक्त बैठकों के जरिए दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल भारत की संसद को विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज और देशों के बीच सेतु के रूप में मजबूत करेगी।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहुदलीय शिष्टमंडलों की तर्ज पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजकर भारत की एकजुटता का संदेश दिया था। अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह दिखाया गया कि देश की सुरक्षा और हितों में भारत एकजुट है। संसदीय मैत्री समूह इसी भावना को आगे बढ़ाने की पहल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजकर भारत की एकजुटता का संदेश दिया था। अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह दिखाया गया कि देश की सुरक्षा और हितों में भारत एकजुट है। संसदीय मैत्री समूह इसी भावना को आगे बढ़ाने की पहल है।
भविष्य में कई अन्य देशों के साथ भी इन समूहों का विस्तार किया जाएगा। यह कदम भारत की संसदीय कूटनीति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला माना जा रहा है।