मेरठ में दलित युवती हत्याकांड पर सियासत तेज, मायावती ने बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद पर साधा निशाना
मेरठ: मेरठ में दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और बहुजन समाज पार्टी (BSP), भीम आर्मी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
ललिता गौतम हत्याकांड पर भड़का विरोध
दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के विरोध में भीम आर्मी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया और आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
प्रदर्शन के दौरान मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) द्वारा प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारने का वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसके बाद मामला और गरमा गया।
मेरठ जाने से पहले पुलिस से भिड़े चंद्रशेखर
भीम आर्मी प्रमुख Chandrashekhar Azad ने ऐलान किया कि वह पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ जाएंगे और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आवाज उठाएंगे।
शुक्रवार को मेरठ पहुंचने के दौरान रोहाना टोल प्लाजा पर पुलिस ने उनके काफिले की कुछ गाड़ियों को रोक दिया, जिसके बाद उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। करीब दो घंटे तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन ने उन्हें मेरठ में प्रवेश की अनुमति दे दी।
मायावती का बड़ा बयान
इसी बीच, बहुजन समाज पार्टी प्रमुख Mayawati ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दलित युवती की हत्या की निंदा करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
हालांकि, उन्होंने बिना नाम लिए चंद्रशेखर आजाद पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता चुनावी फायदे के लिए दलितों के बीच जाकर “घड़ियाली आंसू” बहाते हैं।
मायावती ने कहा, “कुछ लोग दलितों को भड़काकर सड़कों पर उतार देते हैं और बाद में उन्हें कानूनी पचड़ों में फंसाकर खुद गायब हो जाते हैं। दलित समाज को ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।”
‘कानून के दायरे में रहकर उठाएं आवाज’
बीएसपी प्रमुख ने कहा कि दलितों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जरूर करना चाहिए, लेकिन यह संघर्ष संविधान और कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए।
उन्होंने दलित समाज से एकजुट रहने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए राजनीतिक रूप से संगठित होने की अपील भी की।
चंद्रशेखर का पलटवार
मायावती के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर उन्हें वास्तव में दलित समाज के दर्द का एहसास होता, तो वह घर से बयान जारी करने के बजाय मेरठ आकर पीड़ित परिवार से मिलतीं।
उन्होंने कहा, “मैंने कभी मायावती जी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने जिस तरह मुझ पर निजी टिप्पणी की है, उससे मैं निराश हूं।”
विपक्ष ने भी साधा निशाना
मायावती के बयान के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी मैदान में उतर आईं। अयोध्या से समाजवादी पार्टी सांसद Awadhesh Prasad ने कहा कि अब देश जानता है कि मायावती बीजेपी की लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ती हैं और उनके बयानों का जनता पर पहले जैसा असर नहीं रहा।
मेरठ का यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दलित राजनीति, सामाजिक न्याय और आगामी चुनावी समीकरणों का भी अहम मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है।