• March 28, 2026

बिहार की सियासत में उबाल: सांसद पप्पू यादव गिरफ्तार, अस्पताल से नीतीश सरकार पर लगाया हत्या की साजिश का आरोप

पटना। बिहार की राजनीति में शनिवार को उस समय भारी हड़कंप मच गया जब पूर्णिया से एकमात्र निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया। आधी रात को हुई इस कार्रवाई के बाद से राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर है। फिलहाल, पप्पू यादव को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में भर्ती कराया गया है, जहाँ डॉक्टरों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही है। गिरफ्तारी के दौरान हुई खींचतान में सांसद के सिर में चोट आई है और उन्होंने घबराहट के साथ धड़कन बढ़ने की शिकायत की है। वहीं, दूसरी ओर समर्थकों के भारी आक्रोश को देखते हुए राजधानी पटना समेत पूर्णिया और आरा में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

साजिश और हत्या की आशंका: सांसद का गंभीर आरोप

अस्पताल के बेड से मीडिया को संबोधित करते हुए सांसद पप्पू यादव बेहद भावुक और आक्रोशित नजर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि उनकी गिरफ्तारी किसी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी हत्या की एक गहरी साजिश है। यादव ने आरोप लगाया कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि किस जुर्म में पकड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आधी रात को सादे लिबास में पुलिसकर्मी उनके आवास पर पहुंचे और उनके साथ बदसलूकी की गई। सांसद ने सवाल उठाया कि एक जनप्रतिनिधि के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? उन्होंने आशंका जताई कि जेल भेजने के बहाने उनके साथ कोई अनहोनी घटना घटित हो सकती है।

क्या है पुलिस का पक्ष: 21 साल पुराना ‘मकान कब्जा’ मामला

सांसद के आरोपों के बीच पटना पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई को विशुद्ध रूप से कानूनी प्रक्रिया बताया है। पटना के सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी वर्ष 1995 के एक पुराने आपराधिक मामले में कोर्ट द्वारा जारी वारंट के आधार पर की गई है। यह मामला पटना के गर्दनीबाग थाने में दर्ज है, जिसमें तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419, 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 448 (अनाधिकार प्रवेश), 506 (धमकी) और 120बी (साजिश) जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने करीब 21 साल पहले शिकायत दर्ज कराई थी कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने धोखे से उनके मकान को हड़प लिया है। आरोप है कि वे पहले किराएदार के तौर पर मकान में दाखिल हुए और बाद में उस पर अवैध कब्जा जमा लिया। सिटी एसपी ने बताया कि इस मामले में कोर्ट में ट्रायल चल रहा था, लेकिन सांसद तय तारीखों पर पेश नहीं हो रहे थे। बार-बार अदालत की अवमानना और गैर-हाजिरी के बाद न्यायालय ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसका पालन करते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

सड़कों पर समर्थक: नीट केस से जोड़ा जा रहा मामला

पप्पू यादव की गिरफ्तारी की खबर जंगल की आग की तरह फैली और राज्य के विभिन्न हिस्सों में उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए। आरा में समर्थकों ने टायर जलाकर सड़क जाम कर दी, जिससे घंटों यातायात बाधित रहा। समर्थकों और करीबियों का आरोप है कि सरकार पप्पू यादव की लोकप्रियता और उनके द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से घबरा गई है। समर्थकों का कहना है कि सांसद पिछले कई दिनों से ‘नीट’ (NEET) छात्रा मामले और परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। वे लगातार पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद कर रहे थे, जिसे दबाने के लिए पुलिस ने दो दशक पुराने मामले को हथियार बनाया है। समर्थकों ने इसे लोकतंत्र की हत्या और राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह

फिलहाल, पटना पुलिस पप्पू यादव को कोर्ट में पेश करने के लिए उनके स्वास्थ्य की स्थिति सुधरने का इंतजार कर रही है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के तुरंत बाद उन्हें संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस उनकी रिमांड की मांग कर सकती है। पुलिस ने सांसद के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि उन्हें गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वारंट की प्रति दिखाने के बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया था और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई है।

बिहार में एक ओर जहाँ विपक्षी दल इस गिरफ्तारी को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष इसे केवल न्यायालय के आदेश का अनुपालन बता रहा है। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने एक बार फिर बिहार में अपराध और राजनीति के पुराने किस्सों को जिंदा कर दिया है। अब सभी की निगाहें कोर्ट के अगले रुख पर टिकी हैं कि क्या पप्पू यादव को जेल भेजा जाएगा या उन्हें स्वास्थ्य आधार पर राहत मिलेगी।

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