राम रहीम को फिर मिली 40 दिनों की पैरोल: 15वीं बार जेल से बाहर आएगा डेरा प्रमुख, सिरसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
रोहतक/सिरसा: हरियाणा की सुनारिया जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार और जेल प्रशासन ने राम रहीम की 40 दिनों की पैरोल अर्जी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राम रहीम रविवार शाम या सोमवार सुबह तक जेल की चारदीवारी से बाहर आ सकता है। यह 15वां अवसर है जब राम रहीम किसी पैरोल या फरलो के माध्यम से जेल से बाहर आ रहा है। इस बार भी वह अपनी पैरोल की पूरी अवधि सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में बिताएगा, जिसके चलते सिरसा और रोहतक पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी है।
जेल से सिरसा डेरे तक का सफर और सुरक्षा घेरा
गुरमीत राम रहीम को पैरोल मिलने की सूचना मिलते ही रोहतक की सुनारिया जेल के बाहर हलचल तेज हो गई है। जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने जेल परिसर के चारों ओर सुरक्षा का घेरा बढ़ा दिया है ताकि डेरा प्रमुख की रवानगी के समय किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो। बताया जा रहा है कि राम रहीम को कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस के काफिले में सिरसा ले जाया जाएगा।
सिरसा डेरे के भीतर भी अनुयायियों की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट पर है। पिछली बार की तरह इस बार भी प्रशासन ने कुछ शर्तें लागू की हैं, ताकि पैरोल की अवधि के दौरान शांति बनी रहे। राम रहीम के सिरसा पहुंचने से पहले डेरे के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बार-बार मिलती पैरोल और कानूनी प्रावधानों पर बहस
राम रहीम को मिलने वाली लगातार पैरोल ने एक बार फिर देश में कानूनी और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है। आलोचकों का तर्क है कि एक सजायाफ्ता कैदी, जिस पर साध्वी यौन उत्पीड़न और हत्या जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके हैं, उसे इतनी बार पैरोल देना न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, जेल मैनुअल के तहत एक निश्चित समय जेल में बिताने और अच्छे व्यवहार के आधार पर कैदी पैरोल या फरलो का हकदार होता है। हालांकि, पैरोल और फरलो में एक बुनियादी अंतर होता है। पैरोल की अवधि को कैदी की कुल सजा में नहीं गिना जाता, यानी उसे उतने दिन अतिरिक्त जेल में काटने पड़ते हैं। वहीं, फरलो की अवधि सजा का ही हिस्सा मानी जाती है। राम रहीम के मामले में आरोप है कि उसे मिलने वाली इन रियायतों के पीछे राजनीतिक मंशा छिपी होती है, हालांकि सरकार हमेशा इन दावों को खारिज करते हुए इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताती रही है।
2025 में पैरोल का रिकॉर्ड और पुराना इतिहास
साल 2025 गुरमीत राम रहीम के लिए जेल से बाहर रहने के लिहाज से काफी ‘राहत भरा’ रहा है। इस एक साल के भीतर वह चौथी बार जेल से बाहर आ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी और अप्रैल 2025 में उसे 21-21 दिनों की फरलो दी गई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में उसे 40 दिनों की पैरोल मिली थी, जो उसने सिरसा डेरे में ही बिताई थी। अब साल के अंत और नए साल की शुरुआत के बीच एक बार फिर उसे 40 दिनों की पैरोल मिल गई है।
अगर 2017 से अब तक के सफर को देखें, जब उसे पहली बार सजा सुनाई गई थी, तो वह अब तक कुल 14 बार बाहर आ चुका है। यह 15वीं बार होगा जब वह सुनारिया जेल की सलाखों से बाहर कदम रखेगा। बार-बार बाहर आने की इस आवृत्ति ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या अन्य सामान्य कैदियों को भी इसी तत्परता के साथ पैरोल के लाभ दिए जाते हैं या यह केवल रसूखदार कैदियों तक सीमित है।
सियासी गलियारों में हलचल और विपक्ष के आरोप
राम रहीम की पैरोल का समय अक्सर चुनावी सुगबुगाहट या महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ मेल खाता है, जिससे विवाद और गहरा जाता है। हरियाणा की राजनीति में डेरा सच्चा सौदा का एक बड़ा प्रभाव माना जाता है, और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते डेरा प्रमुख को बार-बार राहत दी जाती है।
विपक्षी दलों ने मांग की है कि पैरोल देने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए ताकि जनता का न्यायपालिका और प्रशासन पर भरोसा बना रहे। उनका कहना है कि जघन्य अपराधों के दोषियों को इस तरह की रियायतें देना समाज में गलत संदेश भेजता है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि सभी निर्णय जेल नियमों के दायरे में रहकर लिए गए हैं और इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।
साध्वी यौन उत्पीड़न मामले में मिली थी सजा
उल्लेखनीय है कि गुरमीत राम रहीम 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। उसे दो साध्वियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने 20 साल की कैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उसे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड और रणजीत सिंह हत्या मामले में भी उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। इन गंभीर अपराधों के बावजूद, राम रहीम का जेल से बार-बार बाहर आना और अपने अनुयायियों के बीच समय बिताना भारतीय जेल सुधार और न्याय प्रक्रिया में एक चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल, सिरसा डेरे के अनुयायी अपने गुरु के आगमन की तैयारी कर रहे हैं, जबकि प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आगामी 40 दिनों तक कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में रहे।