• August 10, 2026

दिल्ली में प्रदूषण का ‘विस्फोट’: 300 के करीब पहुंचा एक्यूआई, आनंद विहार और जहांगीरपुरी में सांस लेना हुआ दूभर

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा के आगोश में समाती जा रही है। मौसम के मिजाज में आ रहे बदलावों और हवा की धीमी पड़ती रफ्तार ने दिल्लीवासियों के फेफड़ों पर पहरा बिठा दिया है। ‘एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली’ द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, रविवार की सुबह राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 297 दर्ज किया गया। यह आंकड़ा ‘खराब’ श्रेणी के ऊपरी स्तर पर है और मात्र तीन अंकों की दूरी के साथ ‘बेहद खराब’ (Very Poor) श्रेणी की दहलीज पर खड़ा है। हवा की दिशा में मामूली बदलाव और गति में कुछ वृद्धि के बावजूद, प्रदूषण के स्तर में वह गिरावट दर्ज नहीं की गई है जिसकी उम्मीद दिल्ली के निवासी और पर्यावरण विशेषज्ञ कर रहे थे।

राजधानी की हवा में घुला जहर: ‘बेहद खराब’ श्रेणी की ओर बढ़ते कदम

दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट पिछले कुछ दिनों से लगातार गहरा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत कई पाबंदियां लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर कम ही दिखाई दे रहा है। रविवार सुबह की धुंध इस बात का स्पष्ट संकेत थी कि प्रदूषण का स्तर खतरनाक होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की गति में परिवर्तन होने के बावजूद, स्थानीय कारकों जैसे धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और निर्माण कार्यों ने हवा की गुणवत्ता को सुधरने नहीं दिया है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों ने चिंता को और अधिक बढ़ा दिया है। दिल्ली के समग्र औसत एक्यूआई के मुकाबले कई संवेदनशील इलाकों (Hotspots) में स्थिति पहले ही ‘बेहद खराब’ श्रेणी को पार कर चुकी है। जब एक्यूआई 300 से ऊपर जाता है, तो यह स्वस्थ लोगों के लिए भी श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। मौजूदा स्थिति दिल्ली के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जहां सुबह की सैर पर निकलने वाले लोग अब आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत कर रहे हैं।

इलाकों के अनुसार प्रदूषण की मार: कहां स्थिति सबसे अधिक भयावह?

दिल्ली के विभिन्न मौसम केंद्रों और निगरानी स्टेशनों से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि प्रदूषण का वितरण शहर में एक समान नहीं है। कुछ इलाकों में स्थिति गंभीर (Severe) के करीब पहुंच रही है। रविवार सुबह जहांगीरपुरी और रोहिणी जैसे क्षेत्रों में एक्यूआई 360 दर्ज किया गया, जो राजधानी के सबसे प्रदूषित स्थानों में से एक रहे। आनंद विहार, जो हमेशा से प्रदूषण के केंद्र में रहता है, वहां भी सूचकांक 350 दर्ज किया गया। चांदनी चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में भी हवा की गुणवत्ता 356 तक पहुंच गई है, जो बेहद चिंताजनक है।

अन्य इलाकों की बात करें तो वजीरपुर में 343, विवेक विहार में 331, और अशोक विहार में 332 एक्यूआई दर्ज हुआ। डीटीयू (337) और मुंडका (327) जैसे क्षेत्रों में भी स्थिति ‘बेहद खराब’ बनी हुई है। अलीपुर और आईटीओ जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक और रिहायशी क्षेत्रों में भी एक्यूआई 300 के पार (309) जा चुका है। नरेला में 334, सोनिया विहार में 315, और आरके पुरम में 321 के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि दिल्ली का कोई भी कोना इस जहरीले स्मॉग से अछूता नहीं है। हालांकि, कुछ इलाकों जैसे आया नगर (228), नजफगढ़ (224), और लोधी रोड (218) में स्थिति अपेक्षाकृत कुछ बेहतर रही, लेकिन वे भी ‘खराब’ श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाए हैं। आईजीआई एयरपोर्ट टी3 के पास 180 का आंकड़ा जरूर राहत भरा दिखा, लेकिन समग्र तस्वीर डराने वाली ही है।

मौसम और हवा की गति का खेल: राहत की उम्मीदें धूमिल

पर्यावरण वैज्ञानिकों का विश्लेषण कहता है कि प्रदूषण के इस स्तर के पीछे मौसमी दशाओं का बड़ा हाथ है। वर्तमान में हवा की गति इतनी पर्याप्त नहीं है कि वह हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों (PM 2.5 और PM 10) को शहर से दूर ले जा सके। जब हवा की गति कम होती है, तो प्रदूषक सतह के करीब ही जमा रह जाते हैं, जिससे एक ‘स्मॉग चैंबर’ जैसी स्थिति बन जाती है। पिछले दिनों उम्मीद जताई गई थी कि हवा की दिशा बदलने से प्रदूषण के कणों का बिखराव होगा, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा।

तापमान में आ रही गिरावट भी प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रही है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है, ठंडी हवा भारी हो जाती है और जमीन के पास बैठ जाती है, जो अपने साथ धुएं और धूल के कणों को जकड़ लेती है। इसे ‘इनवर्जन लेयर’ कहा जाता है, जो दिल्ली के लिए हर साल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरती है। अगले कुछ दिनों के लिए मौसम विभाग का अनुमान है कि अगर बारिश नहीं हुई या हवा की गति में भारी वृद्धि नहीं हुई, तो प्रदूषण का स्तर और ऊपर जा सकता है।

स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा और विशेषज्ञों की चेतावनी

वायु गुणवत्ता के ‘बेहद खराब’ होने का सीधा असर दिल्ली के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर पड़ रहा है। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों में पिछले एक हफ्ते में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस की अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान हवा में सांस लेना एक दिन में कई सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक हो सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस जहरीली हवा से सबसे ज्यादा खतरा है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचें। घर के भीतर भी एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने और बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क (N95) का उपयोग करने की सिफारिश की जा रही है। प्रदूषण का यह स्तर न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि हृदय रोगों के जोखिम को भी बढ़ा रहा है।

प्रशासनिक सक्रियता और भविष्य की चुनौतियां

प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार और केंद्र की एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। आनंद विहार और जहांगीरपुरी जैसे हॉटस्पॉट्स पर एंटी-स्मॉग गन का छिड़काव किया जा रहा है और निर्माण गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तात्कालिक उपायों से यह समस्या हल होने वाली नहीं है। सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने, सड़कों की धूल को नियंत्रित करने और कचरा जलाने जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।

दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं और वहां से आने वाले धुएं का प्रभाव भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। हालांकि इस साल पराली जलाने के मामलों में कमी का दावा किया गया है, लेकिन मौसम की प्रतिकूलता उन कमियों को भी ढक दे रही है। अब सबकी नजरें आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हैं, क्योंकि केवल प्राकृतिक बदलाव ही दिल्ली को इस ‘गैस चैंबर’ से तत्काल राहत दिला सकते हैं।

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