क्या भाजपा छोड़ेंगे के. अन्नामलाई? नई पार्टी के ऐलान की अटकलें तेज
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के दिल्ली दौरे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अन्नामलाई पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि वह भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नई राजनीतिक राह चुन सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई भाजपा नेतृत्व को अपने भविष्य के राजनीतिक फैसलों से अवगत करा सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के दौरान अपने अगले कदम पर चर्चा करेंगे। हालांकि, उन्होंने अब तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
नई पार्टी के गठन की अटकलें
अन्नामलाई से जब इन चर्चाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि लोगों को कुछ दिन इंतजार करना चाहिए। उनका कहना है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। इस बीच मदुरै और कोयंबटूर समेत कई शहरों में उनके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें तमिलनाडु को “बचाने” के लिए नया राजनीतिक रूप अपनाने का आग्रह किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई 4 जून को अपने जन्मदिन के अवसर पर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अटकलें हैं कि वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं।
अन्नामलाई की नाराजगी के प्रमुख कारण
1. AIADMK के साथ भाजपा का गठबंधन
अन्नामलाई लंबे समय से भाजपा और AIADMK के बीच गठबंधन के विरोधी माने जाते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तमिलनाडु में अकेले चुनाव लड़ा था और 11.24 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। कोयंबटूर से चुनाव लड़ने वाले अन्नामलाई को भी हार का सामना करना पड़ा।
2. प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत की। हालांकि अप्रैल 2025 में पार्टी ने नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि AIADMK नेतृत्व के साथ गठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए यह बदलाव किया गया था।
3. 2026 विधानसभा चुनाव में सीमित भूमिका
बताया जाता है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया में अन्नामलाई की भूमिका सीमित कर दी गई थी। इससे उनकी नाराजगी बढ़ी और उन्होंने चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया।
4. नीतिगत मतभेद
अन्नामलाई ने समय-समय पर भाजपा की कुछ नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। विशेष रूप से तीन-भाषा नीति को लागू करने के समय को लेकर उन्होंने अपनी असहमति जताई थी और केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई के दिल्ली दौरे ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अन्नामलाई पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि वह भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नई राजनीतिक राह चुन सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई भाजपा नेतृत्व को अपने भविष्य के राजनीतिक फैसलों से अवगत करा सकते हैं। संभावना जताई जा रही है कि वह वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के दौरान अपने अगले कदम पर चर्चा करेंगे। हालांकि, उन्होंने अब तक किसी भी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
नई पार्टी के गठन की अटकलें
अन्नामलाई से जब इन चर्चाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने केवल इतना कहा कि लोगों को कुछ दिन इंतजार करना चाहिए। उनका कहना है कि जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। इस बीच मदुरै और कोयंबटूर समेत कई शहरों में उनके समर्थन में पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें उन्हें तमिलनाडु को “बचाने” के लिए नया राजनीतिक रूप अपनाने का आग्रह किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अन्नामलाई 4 जून को अपने जन्मदिन के अवसर पर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। अटकलें हैं कि वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा भी कर सकते हैं।
अन्नामलाई की नाराजगी के प्रमुख कारण
1. AIADMK के साथ भाजपा का गठबंधन
अन्नामलाई लंबे समय से भाजपा और AIADMK के बीच गठबंधन के विरोधी माने जाते रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने तमिलनाडु में अकेले चुनाव लड़ा था और 11.24 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। कोयंबटूर से चुनाव लड़ने वाले अन्नामलाई को भी हार का सामना करना पड़ा।
2. प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना
अन्नामलाई ने 2021 से 2025 तक तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उनके नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत की। हालांकि अप्रैल 2025 में पार्टी ने नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि AIADMK नेतृत्व के साथ गठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए यह बदलाव किया गया था।
3. 2026 विधानसभा चुनाव में सीमित भूमिका
बताया जाता है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया में अन्नामलाई की भूमिका सीमित कर दी गई थी। इससे उनकी नाराजगी बढ़ी और उन्होंने चुनाव लड़ने से भी इनकार कर दिया।
4. नीतिगत मतभेद
अन्नामलाई ने समय-समय पर भाजपा की कुछ नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। विशेष रूप से तीन-भाषा नीति को लागू करने के सथा।
5. चुनावी रणनीति को लेकर असहमति
गठबंधन प्रबंधन, उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर भी अन्नामलाई और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। माना जाता है कि इन मतभेदों ने उनके और पार्टी नेतृत्व के संबंधों में दूरी बढ़ाई।
फिलहाल अन्नामलाई की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में उनकी दिल्ली यात्रा और संभावित राजनीतिक कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।