यूपी में बिजली विभाग में टकराव खुलकर सामने आया, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने UPPCL चेयरमैन से मांगा जवाब
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली संकट, बढ़े हुए बिजली बिल और विभागीय फैसलों को लेकर ऊर्जा विभाग के भीतर मतभेद अब सार्वजनिक होते दिखाई दे रहे हैं। राज्य के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया है। ऊर्जा मंत्री द्वारा चेयरमैन को भेजे गए एक पत्र में विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में मंत्री ने आरोप लगाया है कि कई महत्वपूर्ण फैसले उनकी जानकारी और सहमति के बिना लिए गए, जिससे सरकार की छवि प्रभावित हुई है। उन्होंने चार प्रमुख मुद्दों पर जवाब मांगा है।
कर्मचारियों की छंटनी और नई भर्तियों पर सवाल
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में कहा कि उनके बार-बार निर्देश देने के बावजूद अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को हटाने की प्रक्रिया जारी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति की गई। मंत्री ने सहारनपुर मंडल से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि बेहट डिवीजन में 15 वर्षों से कार्यरत एक लाइनमैन को हटाकर दूसरे व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई। उन्होंने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर अनुभवी कर्मचारियों की छंटनी तकनीकी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है और इसके नकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
सरकार की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई की मांग
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान अधिकांश विद्युत कर्मचारियों ने पूरी निष्ठा के साथ काम किया, लेकिन कुछ कर्मचारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और आवश्यकतानुसार उनके स्थानांतरण का निर्देश देने की बात कही। साथ ही इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।
मुख्यालय छोड़ने से पहले सूचना देने को कहा
पत्र में मंत्री ने मई के अंत में आए आंधी-तूफान का भी जिक्र किया, जिससे प्रदेश के कई हिस्सों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि 30 मई को स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन उस समय UPPCL चेयरमैन मुख्यालय से बाहर थे। मंत्री के अनुसार, संपर्क करने पर जानकारी मिली कि चेयरमैन कई दिनों तक मुख्यालय से बाहर रहेंगे, जिसके कारण बैठक ऑनलाइन आयोजित करनी पड़ी। उन्होंने इसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले सूचना देने को कहा।
बिजली बिल सरचार्ज बढ़ाने पर जताई नाराजगी
ऊर्जा मंत्री ने अपने पत्र में 29 मई 2026 को जारी उस आदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) में 10 प्रतिशत वृद्धि का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी उन्हें विभागीय स्तर पर नहीं, बल्कि समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। मंत्री का कहना है कि इस फैसले से जनता में सरकार के प्रति नकारात्मक संदेश गया और ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की सहमति ली जानी चाहिए थी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
ऊर्जा मंत्री के पत्र के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। पत्र से यह संकेत मिलता है कि विभागीय निर्णयों और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सरकार और शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि UPPCL चेयरमैन इन सवालों का क्या जवाब देते हैं और सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।