• August 31, 2026

लखनऊ में चुनावी हलचल तेज, BJP-सपा-बसपा ने कसी कमर; अखिलेश के आरोपों पर दयाशंकर सिंह का पलटवार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, लेकिन राजधानी लखनऊ में राजनीतिक दलों की गतिविधियों से अभी से चुनावी सरगर्मी बढ़ती नजर आ रही है। रविवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अलग-अलग बैठकों के जरिए संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया।

तीनों प्रमुख दलों की बैठकों में संगठन विस्तार, बूथ स्तर की तैयारियों और जनता के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने पर खास जोर दिया गया।

BJP ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ की बनाई रणनीति

BJP ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर लखनऊ में कार्यशाला आयोजित की। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत पार्टी के 98 जिलाध्यक्ष शामिल हुए।

बैठक में तय किया गया कि अभियान के तहत करीब एक महीने तक 13 अलग-अलग प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं को केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं एवं उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा लाभार्थियों से संपर्क करने, उनके घरों तक पहुंचने, दीप जलाने और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के जरिए लोगों से जुड़ने पर भी जोर दिया गया। BJP नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं से कहा कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।

अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्षों के साथ की बैठक

वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी के 75 जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहने का निर्देश दिया।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि BJP सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से हर बूथ पर सतर्क रहने और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों पर लगातार नजर रखने को कहा।

सपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने प्रचार अभियान को और तेज करने की भी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का जोर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं से सीधा संपर्क बढ़ाने पर है।

मायावती ने भी संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की

उधर, BSP प्रमुख मायावती ने भी पार्टी के जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर संगठन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने चुनाव से पहले विभिन्न वर्गों, खासकर महिलाओं को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से किए जाने वाले वादों और घोषणाओं पर कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाने की सलाह दी।

मायावती ने कहा कि चुनावी वादों और सत्ता में आने के बाद उनके क्रियान्वयन के बीच अंतर को जनता के सामने रखा जाना चाहिए। BSP प्रमुख ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और लोगों के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने पर जोर दिया।

अखिलेश के STF वाले बयान पर दयाशंकर सिंह का पलटवार

इसी बीच उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अखिलेश यादव की ओर से STF को लेकर लगाए गए आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि STF ने माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की और प्रदेश में अपराध एवं गुंडाराज पर लगाम लगाने का काम किया है।

दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में भी STF मौजूद था, लेकिन उस समय अपराधियों को संरक्षण दिया गया और प्रदेश के कई जिलों में माफिया का प्रभाव बढ़ा।

उन्होंने अपने बयान में पुराने घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले पुलिस का मनोबल कमजोर था, जबकि योगी आदित्यनाथ की सरकार में पुलिस का मनोबल मजबूत हुआ है। दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को कानून का राज पसंद नहीं आ रहा है।

चुनाव से पहले तेज होगी सियासी बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन BJP, सपा और बसपा की हालिया गतिविधियों से साफ है कि तीनों दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक तरफ BJP सरकारी योजनाओं और सेवा अभियानों के जरिए जनता तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर सपा बूथ स्तर पर संगठन और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय है।

वहीं, बसपा भी अपने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुटी है। ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी गतिविधियों के और तेज होने की संभावना है।

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