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UP-Bihar MLC Election: फतेहपुर से आगरा तक बवाल, बूथ कैप्चरिंग के आरोपों पर भिड़े BJP-सपा कार्यकर्ता; अखिलेश और तेजस्वी ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और बिहार में शुक्रवार को विधान परिषद (MLC) चुनाव के दौरान कई जगहों पर हंगामे, मारपीट और कथित चुनावी गड़बड़ियों को लेकर विवाद सामने आए। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, आगरा, वाराणसी और कौशांबी समेत कई इलाकों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की खबरें आईं। समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर फर्जी मतदान और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए, जबकि बीजेपी नेताओं ने भी सपा कार्यकर्ताओं पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

बिहार में भी बीजेपी, जनसुराज और जेडीयू समर्थकों के बीच झड़पों की खबरें सामने आईं। उत्तर प्रदेश में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, वहीं बिहार में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए। हालांकि, मतदान के दौरान सामने आए सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फतेहपुर में पुलिस ने बूथ कैप्चरिंग से इनकार करते हुए घटना को राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच विवाद बताया।

बैलेट पेपर से मतदान, फिर क्यों हुआ विवाद?

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए मतदान कराया गया। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर के जरिए हुआ। इन निर्वाचन क्षेत्रों में केवल निर्धारित पात्र मतदाता ही वोट डाल सकते हैं।

मतदान के दौरान कई जगहों पर फर्जी वोटिंग, मतदाताओं को रोकने, मतदान केंद्रों में अनधिकृत प्रवेश और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए गए। इन घटनाओं को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। मतदान केंद्रों की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठे।

फतेहपुर में हंगामा, फर्जी वोटिंग और CCTV बंद करने के आरोप

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के विजयीपुर ब्लॉक स्थित मतदान केंद्र पर शुक्रवार सुबह हंगामा हो गया। यहां बीजेपी और समाजवादी पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच कथित जबरन मतदान को लेकर विवाद हुआ, जो धक्का-मुक्की तक पहुंच गया।

सपा पक्ष ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र पर दरवाजा बंद कराकर फर्जी वोट डलवाए गए और CCTV कैमरे बंद किए गए। कुछ लोगों ने बैलेट पेपर के कथित दुरुपयोग की शिकायत भी की। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

हालांकि, फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बूथ कैप्चरिंग की घटना से इनकार किया। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसे पुलिस ने नियंत्रित कर लिया। उनके मुताबिक, मतदान बाधित नहीं हुआ और मामले की जांच की जा रही है। इसलिए फर्जी मतदान और बूथ कब्जाने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मुजफ्फरनगर में पोलिंग एजेंट के कार्ड को लेकर भिड़े BJP-सपा कार्यकर्ता

मुजफ्फरनगर में डीएवी डिग्री कॉलेज स्थित मतदान केंद्र पर बीजेपी और सपा कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की खबर सामने आई। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने आरोप लगाया कि सपा प्रत्याशी के नाम वाले कार्ड के साथ कुछ ऐसे लोग पोलिंग एजेंट बनकर पहुंचे थे, जिन्हें अधिकृत नहीं किया गया था।

दूसरी ओर, सपा जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने आरोप लगाया कि कपिल देव अग्रवाल खुद पोलिंग एजेंट नहीं होने के बावजूद मतदान केंद्र के भीतर पहुंचे। उन्होंने बीजेपी नेता पर बूथ के अंदर प्रचार करने और मतदाताओं को धमकाने का भी आरोप लगाया।

इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाए।

गोरखपुर में सपा प्रत्याशी संजय त्रिपाठी को लेकर बढ़ा विवाद

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में डीएवी पीजी कॉलेज के पास बीजेपी और सपा समर्थकों के बीच कहासुनी हुई। सपा प्रत्याशी डॉ. संजय त्रिपाठी मतदान के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें मतदान केंद्र से दूर जाने के लिए कहा, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।

मौके पर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इस घटना को लेकर भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान को प्रभावित करने के आरोप लगाए।

आगरा में सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने लगाए बूथ कैप्चरिंग के आरोप

आगरा में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने कथित बूथ कैप्चरिंग को लेकर शिकायत की। उन्होंने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र के कुछ मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी हुई और उनके पास इससे जुड़े सबूत हैं।

सपा प्रत्याशी अपनी शिकायत लेकर मंडल आयुक्त कार्यालय पहुंचे। उन्होंने चुनाव आयोग और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों पर कथित अनियमितताओं को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारियों की जांच या किसी आधिकारिक निष्कर्ष के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वाराणसी और कौशांबी में भी हुआ विवाद

वाराणसी में सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा के मतदान केंद्र पहुंचने को लेकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस हुई और विवाद बढ़ गया। घटना में मतदान केंद्र के आसपास मौजूद कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी।

वहीं, कौशांबी के नेवादा ब्लॉक में मतदान केंद्र के अंदर गाड़ियों के प्रवेश को लेकर विवाद सामने आया। बीजेपी जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने आरोप लगाया कि सपा कार्यकर्ता बूथ कैप्चरिंग की कोशिश कर रहे थे और पुलिस उनका साथ दे रही थी।

दूसरी ओर, सपा प्रत्याशी मान सिंह यादव ने बीजेपी पर मतदाताओं को धमकाने और फर्जी मतदान कराने की कोशिश का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं हो सकी है।

अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

एमएलसी चुनाव के दौरान सामने आई घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मतदान केंद्रों से जुड़ी कुछ वीडियो साझा करते हुए बीजेपी पर बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान के आरोप लगाए।

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग को नींद की गोली देकर सुला दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग के लिए मतदान के दिन छुट्टी है?

सपा अध्यक्ष के मुताबिक, उनकी पार्टी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कथित अनियमितताओं के वीडियो जुटा रही है। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर चुनाव व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की जाएगी।

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर किया पलटवार

अखिलेश यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह EVM को लेकर सवाल उठा रहे हैं या बैलेट पेपर से हुए मतदान को लेकर।

बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी सपा के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सामने आए विवादों को बूथ कैप्चरिंग का नाम देना उचित नहीं है। इस तरह मतदान के दौरान हुई घटनाओं को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

बिहार में BJP, जनसुराज और JDU समर्थकों के बीच झड़प

बिहार में भी एमएलसी चुनाव के दौरान कुछ स्थानों पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जनसुराज और बीजेपी से जुड़े नेताओं के बीच विवाद की सूचना मिली। लखीसराय में बीजेपी जिलाध्यक्ष दीपक सिंह और जनसुराज नेता सूरज कुमार के बीच कथित विवाद मारपीट तक पहुंच गया।

मोकामा में भी मतदान शुरू होने से पहले जेडीयू और जनसुराज समर्थक आमने-सामने आ गए। झड़प के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद भी हंगामे की खबर सामने आई।

इन घटनाओं को लेकर बिहार में भी चुनावी माहौल तनावपूर्ण होने की चर्चा रही। हालांकि, प्रत्येक मामले में आरोपों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की अलग-अलग पुष्टि आवश्यक है।

तेजस्वी यादव ने लगाया सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल का आरोप

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी के मुताबिक, रात के समय आरजेडी उम्मीदवार डॉ. संजीव के घर पुलिस भेजी गई थी।

तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि, उनके आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच जरूरी है।

MLC चुनाव पर सबकी नजर, आरोपों की जांच अहम

उत्तर प्रदेश में 11 विधान परिषद सीटों के लिए हुए चुनाव में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतदान के दौरान कई जगहों पर हुए विवादों और कथित अनियमितताओं ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।

एक तरफ सपा ने फर्जी मतदान और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है, वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को चुनौती दी है। फतेहपुर में पुलिस ने बूथ कैप्चरिंग से इनकार किया है और जांच जारी होने की बात कही है।

ऐसे में चुनावी गड़बड़ी के आरोपों पर निष्कर्ष संबंधित शिकायतों, CCTV फुटेज, मतदान अभिलेखों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

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