ट्रैवल क्रिएटर अंकिता कुमार की अफगानिस्तान यात्रा: महिलाओं की हकीकत और साहस ने छोड़ी गहरी छाप
सोशल मीडिया पर ‘Monkey Inc’ के नाम से मशहूर ट्रैवल क्रिएटर अंकिता कुमार ने अफगानिस्तान की 13 दिन की सोलो यात्रा के अपने अनुभव साझा किए हैं। लगभग 6 लाख फॉलोअर्स वाली अंकिता भारत की प्रमुख ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स में शामिल हैं और अक्सर ऐसी जगहों की यात्रा करती हैं, जहां जाना आम लोगों के लिए आसान नहीं माना जाता।
अफगानिस्तान में महिलाओं की जिंदगी के करीब से अनुभव
अपनी इस यात्रा के दौरान अंकिता ने अफगानिस्तान में महिलाओं की जिंदगी को करीब से देखा और उसे सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने बताया कि वहां महिलाओं को कई सामाजिक और शैक्षणिक पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, लड़कियों को छठी कक्षा के बाद शिक्षा जारी रखने की अनुमति नहीं है, और कई महिलाओं को नौकरी व सामाजिक जीवन से दूर कर दिया गया है। आर्थिक चुनौतियों के कारण कम उम्र में शादी के मामले भी देखने को मिलते हैं।
कठिन हालात के बावजूद हौसले की मिसाल
अंकिता ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद अफगान महिलाओं का साहस बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कुछ ऐसी महिलाओं से मुलाकात की, जो सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा, कला और समाज सेवा के माध्यम से बदलाव की कोशिश कर रही हैं। कई महिलाओं ने ऑनलाइन स्कूल और शिक्षा से जुड़े प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं, जबकि कुछ कला के जरिए अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दे रही हैं। अंकिता के अनुसार, अफगान महिलाओं की असली ताकत उनके रोजमर्रा के संघर्ष और हार न मानने वाले जज़्बे में दिखाई देती है।
संस्कृति और विरासत का अनुभव
इस यात्रा के दौरान अंकिता ने अफगानिस्तान की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से देखा। उन्होंने पारंपरिक लकड़ी के ‘कमरा-ए-फौरी’ कैमरे का अनुभव साझा किया, जो कभी वहां इंस्टेंट फोटोग्राफी का अनोखा माध्यम था और डार्करूम व प्रिंटिंग सिस्टम एक ही बॉक्स में शामिल होता था।
‘खूबसूरती के साथ दर्द भी देखा’
अंकिता ने कहा कि अफगानिस्तान एक ऐसा देश है जहां बर्फ से ढके पहाड़, मेहमाननवाजी और लोगों की गर्मजोशी एक तरफ है, तो दूसरी तरफ दशकों के संघर्ष और महिलाओं पर लगी पाबंदियों की सच्चाई भी मौजूद है। उन्होंने अपनी इस यात्रा को जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया और कहा कि किसी देश की खूबसूरती के साथ वहां के लोगों के दर्द को समझना भी उतना ही जरूरी है।