तंजील अहमद हत्याकांड: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेयान को किया बरी, फांसी की सजा रद्द
यह मामला 2 अप्रैल 2016 का है, जब Mohammad Tanzil Ahmed, जो National Investigation Agency में डीएसपी पद पर तैनात थे, अपनी पत्नी Farzana के साथ बिजनौर के स्योहारा क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे।
वापसी के दौरान बाइक सवार हमलावरों ने उनकी कार को ओवरटेक कर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस हमले में तंजील अहमद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी फरजाना गंभीर रूप से घायल हो गईं और बाद में उनकी भी मौत हो गई।
इस मामले में रेयान और मुनीर पर हत्या का आरोप लगा था। ट्रायल कोर्ट ने 2022 में दोनों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी और 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, अपील के दौरान मुनीर की मौत हो चुकी है। मामले की सुनवाई के दौरान 19 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें मृतक के परिजन और चश्मदीद गवाह भी शामिल थे।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और रेयान को बरी कर दिया।
यह मामला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि Mohammad Tanzil Ahmed आतंकवाद से जुड़े कई अहम मामलों की जांच कर रहे थे। अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस निर्णय के बाद न्यायिक प्रक्रिया, सबूतों की गुणवत्ता और जांच की दिशा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ सकते हैं।