जस करनी तस भोगहु ताता- अरविंद जयतिलक

‘जस करनी तस भोगहु ताता, नरक जात पुनि क्या पछताता’। गोस्वामी तुलसीदास की यह पंक्ति देश के उन माननीयों के लिए सख्त संदेश है जो…