नतीजों से पहले पिनराई विजयन का बड़ा संकेत? सोशल मीडिया से हटाया ‘मुख्यमंत्री’ पद
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मतगणना से ठीक पहले अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से ‘मुख्यमंत्री’ शब्द हटा दिया है। अब उनके परिचय में केवल माकपा (CPI-M) के पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में पहचान दर्ज है।
इस छोटे से बदलाव ने बड़े राजनीतिक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या यह संभावित हार का संकेत है या फिर महज एक औपचारिक प्रक्रिया।
दो तरह की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में इस कदम को लेकर दो तरह की राय सामने आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि एग्जिट पोल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की बढ़त के संकेतों को देखते हुए यह बदलाव संभावित हार की स्वीकारोक्ति हो सकता है।
वहीं, विजयन समर्थकों का कहना है कि यह लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है, जहां नई सरकार के गठन से पहले पद का मोह छोड़ना एक नैतिक कदम माना जाता है।
धर्माडम में कड़ी टक्कर
पिनराई विजयन इस बार अपनी पारंपरिक धर्माडम सीट से चुनाव मैदान में हैं, जहां मुकाबला पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। यूडीएफ के वीपी अब्दुल रशीद और भाजपा के के रंजीत ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
हालांकि 2021 में विजयन ने इस सीट पर रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार बढ़ी हुई वोटिंग (करीब 78.27%) को सत्ता विरोधी रुझान के रूप में भी देखा जा रहा है।
वामपंथ के लिए अहम चुनाव
2021 में इतिहास रचने वाली एलडीएफ सरकार के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। अगर रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो केरल में दशकों पुरानी सत्ता परिवर्तन की परंपरा एक बार फिर लौट सकती है। इसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी राजनीति के लिए भी यह बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि केरल फिलहाल उनका सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है।
अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले अंतिम नतीजों पर टिकी हैं। यह साफ होगा कि विजयन का यह सोशल मीडिया बदलाव महज औपचारिकता था या सत्ता से संभावित विदाई का संकेत।